अनाथ - अध्याय 3

उस रात... आसमान पूरी तरह शांत था। बारिश रुक चुकी थी, लेकिन हवा में अब भी मिट्टी की भीनी-सी खुशबू तैर रही थी। अनाथालय के सभी बच्चे गहरी नींद में सो चुके थे। पूरे परिसर में सिर्फ़ घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी। लेकिन... मानव की आँखों में नींद नहीं थी। वह स्टोर रूम के उसी कोने में बैठा था, जहाँ उसे वह रहस्यमयी डायरी मिली थी। दिनभर की मार, अपमान और दर्द के बावजूद उसके मन में सिर्फ़ एक सवाल घूम रहा था— "मैं कौन हूँ?" उसने एक बार फिर डायरी का आख़िरी पन्ना खोला। जैसे ही उसने