अनाथ - अध्याय 4

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रात के लगभग ढाई बज रहे थे। पूरा अनाथालय गहरी नींद में डूबा हुआ था। बरामदे में लगी पुरानी घड़ी की टिक-टिक उस सन्नाटे को और भी भयावह बना रही थी। मानव अपने छोटे-से कमरे में खिड़की के पास खड़ा था। उसके हाथ में वही पुरानी डायरी थी, जिसके साथ मिली तस्वीर और नक्शे ने उसकी पूरी दुनिया बदल दी थी। उसने आख़िरी बार कमरे को देखा। यही कमरा... जहाँ उसने बचपन बिताया था। यहीं उसने भूख सही... मार खाई... और हर रात अपने माता-पिता के लौटने का इंतज़ार किया। लेकिन आज... वह सब पीछे छोड़कर जा रहा था। उसने