आगे के भाग में आपने पढ़ा कि दृष्टि के पति ने अपने माता-पिता को मनाने का दृष्टि को कह तो दिया पर कहीं न कहीं दिपक को भी पता ही था कि उसके माता-पिता कभी भी नहीं मानेंगे दृष्टि को परीक्षा दिलाने के लिए । बहुत सोचने के बाद भी कोई रास्ता ही नहीं मिल रहा था। पर साथ ही दोनों ही परीक्षा के तैयारी तो कर ही रहे थे। अब जल्द ही परीक्षा का दिन भी आने वाला था तो दिपक ने सोचा कि क्यों न दृष्टि को उसके साथ ही ले जाए पर उसके लिए भी घर में