रात के लगभग ग्यारह बज चुके थे।शहर से लगभग दस किलोमीटर दूर, घने जंगलों के बीच एक पुरानी इमारत खड़ी थी। उसकी टूटी हुई खिड़कियों से हवा सीटी बजाती हुई अंदर जा रही थी।इमारत के ऊपर लगा जंग लगा बोर्ड आधा टूट चुका था—"सेंट मार्था मानसिक चिकित्सालय"कभी यहाँ सैकड़ों मरीज रहा करते थे। लेकिन पिछले कई दशकों से यह जगह बंद थी। लोग कहते थे कि रात के समय यहाँ से चीखने की आवाज़ें आती थीं।कभी किसी बच्चे के रोने की। कभी किसी औरत के चिल्लाने की। और कभी...किसी ऐसे इंसान की चीख, जिसकी आवाज़ इंसानी नहीं लगती थी। आज