बनिए के नौकर तुरतई गोदाम में जा पहुँचे।फिर का था—एक ने बोरा उठाया, दूसरे ने बोरा पकड़ा और तीसरे ने बैलगाड़ी में जमाना शुरू कर दियो।गेहूँ ,चावल ,आटा ,दाल ,चीनी ,नमक ,तेल , घी,गुड़ , ऊपर से घर-गृहस्थी का इतनो सामान भर दियो कि बैलगाड़ी भी मन ही मन बोली होगी—"भाई, मुझसे जितनो काम है उतनोई लेवो, मुझे घर मत समझ लेयो!"बैल बेचारे भी गाड़ी का वजन देखकर एक-दूसरे की तरफ देखने लगे।जब गाड़ी पूरी भर गई तो बनिया खुद आकर खडो हो गओ उसने एक-एक बोरे को देखो ओर र नौकरों से बोला—"देखो, अम्मा के घर कोई चीज की