अनकहा सच (भाग - 4)

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अनकहा सच___आखिरकार कोचिंग में दिवाली की छुट्टियाँ शुरू हो ही गईं।ओर यहां राजू के घर जाने के विचार से ही घबराहट बढ़ गई।छुट्टी का ऐलान होते ही हितेश दौड़ता हुआ राजू के कमरे पर पहुँचा और बड़े उत्साह से बोला, "चल भाई! छुट्टियाँ लग गई हैं, अब तो निकलते हैं! कसम से, बहुत टाइम हो गया घर गए हुए... इस बार तो बड़े मज़े से दिवाली मना कर आऊँगा। कुछ दिन आराम भी मिल जाएगा यार!"राजू ने उसकी तरफ देखा और घबराहट के साथ एक हल्की मुस्कान के साथ कहा, "हाँ सही है... लेकिन अभी चलना हैं क्या?मेरा मतलब कल