अनकहा सच (भाग-10)

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अनकहा सच___राजू ने आँखों में छलकते आँसुओं को दबाते हुए कहा, "हाँ... बहुत प्यारी थी मेरी छोटी बहन।"हितेश ने थोड़ा सोचकर पूछा, "फिर... तेरा छोटा भाई कहाँ है?"राजू ने हितेश की तरफ देखा। हितेश की यह बात सुनकर राजू की आँखों में एक बार फिर दर्द का सैलाब उमड़ पड़ा। उसने खुद को सँभालते हुए रुंधे गले से कहा, "हुआ यह कि... उनके जन्म के मुश्किल से सात-आठ दिन ही बीते थे। एक सुबह जब हम सोकर उठे, तो मेरी माँ और मेरा छोटा भाई घर में नहीं थे।"हितेश ने हैरान होकर पूछा, "क्या?! माँ और भाई घर पर नहीं