बाँसुरी की धुनभाग 18 — त्याग की राहसुबह का सूरज गाँव के ऊपर धीरे-धीरे चढ़ रहा था। लेकिन उस दिन गाँव की सुबह में रोज जैसी चहल-पहल नहीं थी। लोगों के चेहरों पर उदासी थी। किसी के मन में आक्रोश था, तो किसी की आँखों में आँसू।रामलाल अपनी पत्नी सलमा और बच्चों के साथ गाँव छोड़कर वन की ओर जा रहा था। उसके कंधे पर एक छोटी-सी गठरी थी। सलमा ने जरूरी सामान बाँध रखा था। बच्चे अपने पिता के पीछे चुपचाप चल रहे थे। उन्हें पूरी तरह समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उनका परिवार अपना घर