यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई

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                        : प्रकरण 13 :" कीसी ! तुम मुझे राखी बांधोगी? "उस की बिरादरी में यह त्यौहार मनाया नहीं जाता था. फिर भी उस ने मेरा प्रस्ताव ख़ुशी ख़ुशी कबूल कर लिया था.लेकिन उस ने एक शर्त रखी थी." मैं यक़ीनन हर साल आप को राखी बांधूगी. लेकिन इस बार आप को मेरे घर आना होगा. "और दूसरे दिन छुट्टी भी थी. और मैं राखी बंधवाने के लिये तैयार हो गया था.और दूसरे दिन उस के घर भी गया था.लेकिन उस के घर में ताला लगा हुआ था .