यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई

  • 87

                      : प्रकरण -32 :कई साल बीत गये थे. लेकिन मैं अनन्या का दोरंगी किस्सा भूल नहीं पाया था. हमें शादी में न्योता मिला था. शादी में मैं केवल उपस्थित था. गीता बहन ने खुद गिफ्ट देकर मुझे अनन्या की शादी में भेजा था. मुझे देखकर उस ने ख़ुशी जाहिर की थी.उस के साथ मेरा क्या रिश्ता था? मैं कभी नहीं समझ पाया था.मैं इस रिश्ते को लेकर सदैव असमंजस में रहा था.इस के लिये अनन्या और अपूर्व का दो रंगी रिश्ता जिम्मेदार था.एक तरफ वह अपूर्व को राखी बांधती