दीवाने की दिवानियत

(6)
  • 99
  • 0
  • 5k

एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर सरकारी कायदे-कानून को मानने वाले इंसान थे, जबकि भानु प्रताप ठाकुर के लिए उनका शब्द ही कानून था। उस दिन हवेली के बगीचे में 8 साल का पृथ्वी और 5 साल की सनाया खेल रहे थे। "पृथ्वी! दम है तो पकड़ के दिखाओ!" सनाया अपनी फ्रॉक संभालते हुए तेजी से भागी। पृथ्वी उसके पीछे दौड़ रहा था और बार-बार चिल्ला रहा था, "सनाया, रुक जा! गिर जाएगी तो चोट लगेगी, फिर मत रोना।" लेकिन सनाया कहाँ सुनने वाली थी? वो बस भागती रही और अचानक उसका पैर एक ईंट से टकराया। वो धड़ाम से गिरी और उसके घुटने से खून निकलने लगा।

1

दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 1

एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोटदरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर सरकारी कायदे-कानून को मानने वाले इंसान थे, जबकि भानु प्रताप ठाकुर के लिए उनका शब्द ही कानून था।उस दिन हवेली के बगीचे में 8 साल का पृथ्वी और 5 साल की सनाया खेल रहे थे।"पृथ्वी! दम है तो पकड़ के दिखाओ!" सनाया अपनी फ्रॉक संभालते हुए तेजी से भागी।पृथ्वी उसके पीछे दौड़ रहा था और बार-बार चिल्ला रहा था, "सनाया, रुक जा! गिर ...Read More

2

दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 2

नफरत का सामना और पुरानी यादेंदरभंगा की सड़कों पर आज अजीब सा सन्नाटा था। खबर फैल चुकी थी कि में एक नया कड़क ऑफिसर आया है जिसने ज्वाइन करते ही ठाकुर साहब के दो खास गुर्गों को हवालात में डाल दिया है। ये खबर जब ठाकुर हवेली पहुँची, तो वहां का माहौल गरम हो गया।सनाया का दबदबाहवेली के बरामदे में 30 साल की सनाया ठाकुर बैठी थी। वो अब वो 5 साल की बच्ची नहीं थी जो गिरकर रोने लगती थी। आँखों में काजल, गले में सोने की पतली चैन और चेहरे पर एक ऐसी कड़वाहट जो बरसों की ...Read More

3

दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 3

एपिसोड 3: वफादारी की अग्निपरीक्षातालाब के किनारे सन्नाटा था, बस सनाया की तेज चलती सांसों की आवाज सुनाई दे थी। पृथ्वी का कंधा खून से लथपथ था, लेकिन उसकी नजरें सनाया के चेहरे पर टिकी थीं।"तुमने मुझे क्यों बचाया, सनाया?" पृथ्वी ने दबी आवाज में पूछा।सनाया ने बिना कोई जवाब दिए अपने दुपट्टे का एक हिस्सा फाड़ा और मजबूती से पृथ्वी के जख्म पर बांध दिया। उसकी आंखों में खौफ और गुस्सा एक साथ था। "ये मत समझना कि मैंने तुम्हें माफ कर दिया है। मैं बस नहीं चाहती कि मेरे शहर की बदनामी हो कि ठाकुरों ने किसी ...Read More

4

दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 4

बगावत के सुरशहर में खबर फैल गई कि स्टेशन की जमीन पर काम फिर से शुरू हो गया है। बार पृथ्वी राठौर खुद अपनी जिप्सी लेकर वहां तैनात था, और उसके साथ भारी पुलिस बल था। यह सीधा चैलेंज था भानु प्रताप ठाकुर की सल्तनत को।हवेली का कोहरामभानु प्रताप के खास आदमी, कालिया ने रात वाली पूरी बात ठाकुर साहब के कानों में डाल दी थी। हवेली के बैठक में सन्नाटा था, लेकिन भानु प्रताप की आँखों में अंगारे दहक रहे थे।"सनाया!" भानु प्रताप की आवाज गूँजी।सनाया सीढ़ियों से नीचे उतरी, उसने देखा कि उसके पिता की लाइसेंसी बंदूक ...Read More

5

दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 5

एपिसोड 5: नई आग के सुरनई सुबह की उम्मीदसूरज की पहली किरणें दरभंगा के स्टेशन इलाके पर पड़ रही मशीनें गरजने लगी थीं, और मजदूर काम में जुटे थे। सनाया अभी भी उसी पत्थर पर बैठी थी, जहां कल शाम पृथ्वी ने उसका हाथ थामा था। उसकी आंखें सूजी हुई थीं, लेकिन दिल में एक अजीब शांति थी। 25 साल की दुश्मनी खत्म हो चुकी थी, पर उसके पिता की हथकड़ी उसके सीने पर भारी पड़ रही थी।पृथ्वी जिप्सी से उतरा और उसके पास आया। उसके चेहरे पर थकान थी, लेकिन आंखों में चमक। "सनाया, चलो। IG साहब बुला ...Read More

6

दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 6

बगावत के सुरएपिसोड 6: नई जड़ें, पुराने कांटेनई शुरुआत की कसौटीदरभंगा की शामें अब शांत हो चुकी थीं। स्टेशन पर काम जोर-शोर से चल रहा था, और पृथ्वी राठौर हर सुबह साइट पर पहुँचते ही सनाया को एक मैसेज भेजते: "आज भी सब ठीक। तुम बस मुस्कुराती रहो।"सनाया अब हवेली छोड़ चुकी थी। एक छोटे से फ्लैट में शिफ्ट हो गई, जहाँ वो दिन-रात अपने पिता के केस की फाइलें देखती। भानु प्रताप जेल में था, लेकिन कोर्ट में अपील की खबरें आ रही थीं। सनाया का दिल भारी था—पिता का अपराधी बनना उसकी जीत नहीं, हार लग रही ...Read More

7

दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 7

बगावत के सुरएपिसोड 7: न्याय की आग, बदले की छायादरभंगा की सुबहें अब साये से भरी थीं। स्टेशन प्रोजेक्ट साइट पर मजदूर तेजी से काम कर रहे थे, लेकिन पृथ्वी राठौर की आँखें हर कोने पर टिकी रहतीं। कालिया भाग चुका था, और वो जानता था—ये जंग अभी अधर में लटकी है। सनाया उसके साथ साइट पर आती, फाइलें चेक करती, लेकिन उसकी आँखों में डर साफ झलकता। भानु प्रताप की डायरी ने सब बदल दिया था। पिता का कत्ल—ये राज पृथ्वी के सीने में आग की तरह सुलग रहा था।कालिया की साजिशरात के अंधेरे में कालिया अपने ठिकाने ...Read More

8

दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 8

बगावत के सुरएपिसोड 8: छिपा मास्टरमाइंड, टूटती नींवदरभंगा की बारिश रुकी नहीं थी। जेल की सलाखों के पीछे भानु चिट्ठी पढ़कर मुस्कुरा रहा था। कालिया पकड़ा गया, लेकिन उसकी आँखों में चमक थी। बाहर, पृथ्वी राठौर सनाया के फ्लैट में बैठा चिट्ठी को बार-बार पढ़ रहा था। "भानु प्रताप अकेला नहीं। बड़ा मास्टरमाइंड बाहर है।" सनाया ने उसका हाथ थामा। "ये खत खत्म नहीं कर सकता हमें। स्टेशन प्रोजेक्ट रुका नहीं है। कल इंस्पेक्शन है, चलो वहाँ।" पृथ्वी ने सिर हिलाया, लेकिन मन में शक का बीज बो चुका था। कौन है ये मास्टरमाइंड? कोई पुराना दुश्मन या नया?स्टेशन ...Read More

9

दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 9

जेल में राय और भानु प्रताप का सामना हुआ। भानु चिल्लाया, "तूने मुझे बेचा!" राय बोला, "तूने मेरी कमाई दोनों के राज खुल गए। कोर्ट में डायरी और रिकॉर्डिंग से केस मजबूत। स्टेशन प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली।नई शुरुआतएक हफ्ते बाद, साइट पर पूजा हुई। पृथ्वी और सनाया नींव रख रहे थे। रमेश पट्टी बाँधे मुस्कुरा रहा। सनाया ने कहा, "अब पुरानी दुश्मनी खत्म। हमारा स्टेशन दरभंगा बदलेगा।" पृथ्वी ने उसे गले लगाया। "और हमारा प्यार भी। शादी करेंगे, सनाया। नई जिंदगी।" शाम ढली, दोनों बालकनी में बैठे। सूरज डूबा, लेकिन उम्मीद चमकी।लेकिन कोर्ट से एक चिट्ठी आई। भानु ...Read More

10

दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 10

बगावत के सुरएपिसोड 10: अंतिम जंग, नई सुबह )दरभंगा की सर्द हवाएँ अब गर्माहट से लबरेज़ हो चुकी थीं। स्टेशन प्रोजेक्ट चमक-दमक के साथ तैयार खड़ा था—चकाचौंध प्लेटफॉर्म, आधुनिक सिग्नलिंग, ट्रेनों की सीटी गूँज रही। उद्घाटन का दिन करीब था। पृथ्वी राठौर और उनकी पत्नी सनाया राठौर (पहले ठाकुर) हनीमून के बाद नई जिंदगी बसा चुके थे। हर सुबह सनाया चाय बनाती, पृथ्वी साइट का निरीक्षण करता। विक्रम, सनाया का सौतेला भाई, पूरी तरह सुधर चुका—अब साइट का सुपरवाइजर। रमेश सिक्योरिटी चीफ। लेकिन जेल से भानु प्रताप का मैसेज भूल न पाए। "मेरा आखिरी हथियार बाकी। स्टेशन उद्घाटन पर ...Read More

11

दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 11

मंच पर उद्घाटन फिर शुरू। मंत्री ने रिबन काटा। पहली ट्रेन सीटी बजा कर आई। पृथ्वी-सनाया ने प्लेटफॉर्म पर होकर तालियाँ सुनीं। शहर ने जश्न मनाया। शाम को घर लौटे। सनाया ने कहा, "सब खत्म। अब हमारा बच्चा आएगा—स्टेशन की तरह मजबूत, प्यार से भरा।" पृथ्वी हँसा, गले लगाया। "हाँ, बेटा हो या बेटी—राठौर-ठाकुर का वारिस। बगावत के सुर हमेशा के लिए शांत।"एपिलॉग: नई सुबहमहीनों बाद स्टेशन चहल-पहल से गुलजार। पृथ्वी स्टेशन मैनेजर, सनाया सोशल वर्कर—गरीबों के लिए ट्रेन टिकट स्कीम चला रही। विक्रम पार्टनर, शादीशुदा। रमेश प्रमोशन पा चुका। एक शाम बालकनी में सनाया बोली, "याद है वो ...Read More