कई सालों से मैं एक सपना देख रहा हूं। जहां सामने नीला पानी और किनारे पर फैली सुनहरी रेत... फिर एक पांव दिखता था सपने में जो हमेशा ना..आधा पानी में होता था और आधा किनारे पर। उस पांव की वह गोरी गुलाबी सी एड़ी...और उस एड़ी में एक नाज़ुक सी चांदी की पायल, जो उन लहरों पर तैरती हुई सी दिखती, फिर अचानक पानी की एक लहर पीछे हटती तो वह एड़ी ऐसे दिखती, जैसे सूरज की पहली किरण से निखर उठती हो। पानी की वो लहर उन गोरे तलवों के नीचे से रेत खींच ले जाती।
सीप का मोती - भाग 1
प्रस्तुत कथा मराठी लेखक shabdbhrmar की मराठी कहानी 'कोंदण'' का हिंदी रूपांतरण है। इसका उद्देश्य इस बेहतरीन रचना को पाठकों तक पहुँचाना है। भाग १कई सालों से मैं एक सपना देख रहा हूं। जहां सामने नीला पानी और किनारे पर फैली सुनहरी रेत... फिर एक पांव दिखता था सपने में जो हमेशा ना..आधा पानी में होता था और आधा किनारे पर। उस पांव की वह गोरी गुलाबी सी एड़ी...और उस एड़ी में एक नाज़ुक सी चांदी की पायल, जो उन लहरों पर तैरती हुई सी दिखती, फिर अचानक पानी की एक लहर पीछे हटती तो वह एड़ी ऐसे दिखती, जैसे सूरज की पहली किरण से निखर उठती हो। पानी की वो लहर उन गोरे तलवों के नीचे से रेत खींच ले जाती।न मालूम ...Read More