Love Beyond Countries

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एक अनजाना ईमेल दिल्ली की ठंडी शाम थी। नवंबर की हल्की हवा खिड़की से कमरे में आ रही थी। बाहर सड़क पर गाड़ियों का शोर था, लेकिन आरव की दुनिया उस छोटे-से कमरे और उसके लैपटॉप तक सीमित थी। आरव 23 साल का एक साधारण भारतीय लड़का था। उसके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक थे और माँ गृहिणी। वह एक फ्रीलांस ग्राफिक डिज़ाइनर था। उसके सपने बहुत बड़े थे, लेकिन बैंक अकाउंट हमेशा छोटा रहता था। दिन भर काम करने के बाद वह रात में एक अंतरराष्ट्रीय भाषा सीखने वाले प्लेटफ़ॉर्म पर अंग्रेज़ी का अभ्यास करता था। उसी रात उसकी स्क्रीन पर एक नया संदेश आया।

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Love Beyond Countries - Part 1

भाग – 1 : एक अनजाना ईमेलदिल्ली की ठंडी शाम थी। नवंबर की हल्की हवा खिड़की से कमरे में रही थी। बाहर सड़क पर गाड़ियों का शोर था, लेकिन आरव की दुनिया उस छोटे-से कमरे और उसके लैपटॉप तक सीमित थी।आरव 23 साल का एक साधारण भारतीय लड़का था। उसके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक थे और माँ गृहिणी। वह एक फ्रीलांस ग्राफिक डिज़ाइनर था। उसके सपने बहुत बड़े थे, लेकिन बैंक अकाउंट हमेशा छोटा रहता था।दिन भर काम करने के बाद वह रात में एक अंतरराष्ट्रीय भाषा सीखने वाले प्लेटफ़ॉर्म पर अंग्रेज़ी का अभ्यास करता था।उसी रात उसकी ...Read More

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Love Beyond Countries - Part 2

भाग – 2 : सीमाओं से भी बड़ा प्रेमरात के तीन बज चुके थे।आरव की आँखों में नींद नहीं मोबाइल की स्क्रीन पर वही आख़िरी संदेश चमक रहा था—"Aarav... Don't come."उसने शायद सौ बार कॉल किया, लेकिन हर बार फोन बंद मिला।सुबह होते ही उसने खुद से एक सवाल पूछा—"अगर मैं नहीं गया, और यह उसकी मजबूरी हुई तो? अगर मैं गया, और उसने सच में मुझे नहीं चाहा तो?"कई मिनट तक वह चुप बैठा रहा।फिर उसने पासपोर्ट उठाया, टिकट हाथ में लिया और आईने में खुद को देखकर कहा—"प्यार डर से नहीं, भरोसे से चलता है। मैं जाऊँगा।"---दो ...Read More