Best Biography in English, Hindi, Gujarati and Marathi Language

मेरी आत्मकथा - मिट्टी से शब्दों तक

by Raju kumar Chaudhary
  • 141

️ मेरी आत्मकथा“मिट्टी से शब्दों तक”मैं — राजु कुमार चौधरीमेरा नाम राजु कुमार चौधरी है। मेरा जन्म 17 अप्रैल ...

यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई ( 47)

by Ramesh Desai
  • 243

: : प्रकरण - 47 : : दिवाली के धमाकेदार फटाखे से सुंदर की आँखों ...

હું, મારું કેન્સલ અને Gratitude

by RAHUL VORA
  • 1.2k

હું,મારું “કેન્સલ” અને Gratitude - 1 Gratitude એ અંગ્રેજી શબ્દ છે.એને માટે ગુજરાતી શબ્દ છે ઋણ સ્વીકાર. ...

यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई - (46)

by Ramesh Desai
  • 555

: : प्रकरण - 46 : : गोवेर्धन राय त्रिपाठी में उपन्यास ' सरस्वती चंद्र' लिखी ...

यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई - (45)

by Ramesh Desai
  • 621

: : प्रकरण - 45 : : आज से छह से भी ज्यादा दायके के पहले परिस्थिति ...

मैं दादा-दादी की लाड़ली - 7

by sapna
  • 426

अध्याय 7 – अब मैं चुप नहीं हूँ(दादा-दादी की लाडली का सफर)मैं वही लाडली हूँ,जिसे दादा-दादी ने हमेशा अपने ...

यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई - (44)

by Ramesh Desai
  • 372

: : प्रकरण - 44 : : मेरे दिमाग़ में क्या क्या ख्याल आते थे. ...

अविस्मरणीय यात्रा - रंजन कुमार देसाई - (31)

by Ramesh Desai
  • 432

प्रकरण -31 माझ्या परिसरात एक महाराष्ट्रीय जोडपे राहायला आले. त्यांना एक लहान मुलगी होती. काहीतरी घडले आणि आमची दोन्ही ...

यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई - (43)

by Ramesh Desai
  • 567

: : प्रकरण - 43 : : सुंदर काम करता था. उस से मुझे कोई दिक्कत ...

मैं दादा-दादी की लाड़ली - 6

by sapna
  • 348

मैं दादा-दादी की लाडली – 6दूसरी शादी — वही टूटा भरोसायह “मैं दादा-दादी की लाडली” की कहानी का छठा ...

યાદોં ની સહેલગાહ - રંજન કુમાર દેસાઈ - (32)

by Ramesh Desai
  • 344

પ્રકરણ - 32 નકારાત્મક વિચારસરણી તેની ઔકાત હતી, તેનું હથિયાર હતું, જેને કારણે તેનું જીવન બરબાદ થઈ ગયું હતું. ...

भोजपुरी भाषा के महानायक जुगानी भाई

by नंदलाल मणि त्रिपाठी
  • (0/5)
  • 486

आवाज का अंदाज भोजपुरी भाषा के महानायक जुगानी भाई--आत्मा कर्मानुसार काया के साथ जन्म लेती है काल समय के ...

अविस्मरणीय यात्रा - रंजन कुमार देसाई - (30)

by Ramesh Desai
  • 456

प्रकरण - 30 दिल्लीत्या गोटाळा मला खूप निराश केले होते. मला माझी कन्सल्टन्सी बंद करावी लागली. ...

यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई - (43)

by Ramesh Desai
  • 663

: : प्रकरण - 43 : : सुंदर काम करता था. उस से मुझे कोई दिक्कत ...

યાદોં ની સહેલગાહ - રંજન કુમાર દેસાઈ - (31)

by Ramesh Desai
  • 384

પ્રકરણ -31 મારા પડોશમાં એક મહારાષ્ટ્રીયન દંપતિ રહેવા આવ્યું હતું. તેમને એક નાની દીકરી હતી. ...

Unforgettable Voyage - Ranjan Desai - 31

by Ramesh Desai
  • 309

Chapter - 30 That con man from Delhi had left me very disappointed. I had to ...

अविस्मरणीय यात्रा - रंजन कुमार देसाई - (29)

by Ramesh Desai
  • 744

प्रकरण - 29 माझ्यामुळे नमिता पुन्हा योग्य मार्गावर आली. अनिकेत तिच्याशी लग्न करण्यास तयार झाला. ...

यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई - (42)

by Ramesh Desai
  • 573

: : प्रकरण - 42 : : उस के बाद ऐसी धारावाहिक प्रदर्शित हो रही थी. ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 17

by Dr. Suryapal Singh
  • 450

जीतेशकान्त पाण्डेय- अवकाश प्राप्ति के बाद आपकी दिनचर्या क्या रही ? डॉ0 सूर्यपाल सिंह- अवकाश प्राप्ति के बाद एक ...

યાદોં ની સહેલગાહ - રંજન કુમાર દેસાઈ - (30)

by Ramesh Desai
  • 366

પ્રકરણ - 30 દિલ્હીના તે બદમાશ, લૂંટારાએ ખરેખર મારી જોડે વિશ્વાસ ઘાત કર્યો હતો. જેને કારણે મારે મારી કન્સલ્ટન્સીનો ...

Unforgettable Voyage - Ranjan Desai - 30

by Ramesh Desai
  • (4/5)
  • 303

Chapter - 30 That con man from Delhi had left me very disappointed. I had to ...

अविस्मरणीय यात्रा - रंजन कुमार देसाई - (28)

by Ramesh Desai
  • 771

प्रकरण - 28 चित्रपट निर्मात्याने त्याची फसवणूक केली होती. त्याच्या कथेवर आधारित चित्रपटातून त्याने कोट्यवधी रुपये कमावले होते. तरीही, ...

यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई - (41)

by Ramesh Desai
  • 750

: : प्रकरण -41 : : फिल्मों का जमाना जारी था. साथ में टेलीविझन धारावाहिक की भी ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 16

by Dr. Suryapal Singh
  • 795

4 मार्च 1990 को यह शादी सम्पन्न हो गयी। शादी निपटने के बाद मैं अपने कॉलेज चला गया। अब ...

Unforgettable Voyage - Ranjan Desai - 29

by Ramesh Desai
  • (0/5)
  • 345

Chapter - 29 Because of me, Namita was back on the right track. Aniket was ready ...

मैं दादा-दादी की लाड़ली - 5

by sapna
  • 1k

यह “मैं दादा-दादी की लाडली” की कहानी का पाँचवाँ अध्याय है।बचपन की मासूमियत और सपनों के बाद,अब मेरी ज़िंदगी ...

યાદોં ની સહેલગાહ - રંજન કુમાર દેસાઈ - (29)

by Ramesh Desai
  • 610

પ્રકરણ - 29 મારા કારણે નમિતા સાચા રસ્તે પાછી ફરી હતી. અનિકેત તેની સાથે લગ્ન કરવા સંમત થયો હતો. ...

अविस्मरणीय यात्रा - रंजन कुमार देसाई - (27)

by Ramesh Desai
  • 939

प्रकरण - 27 स्नेहा आणि नीला यांना एक चांगला साथीदार मिळाला होता. त्यांनी एकमेकांची चांगली ...

यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (40)

by Ramesh Desai
  • 885

: : प्रकरण -40 : : मेरी बहन की लड़की की शादी में मैं बड़ोदा गया ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 15

by Dr. Suryapal Singh
  • 876

इसी तरह हर वर्ष एक सप्ताह व्याख्यान एवं मंचीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाता। बच्चे इसमें काफी रुचि लेते। ...