Best biography in English, Hindi, Gujarati and Marathi Language

पके फलों का बाग़ - 5
by Prabodh Kumar Govil
  • 159

मुझे अपने जीवन के कुछ ऐसे मित्र भी याद आते थे जो थोड़े- थोड़े अंतराल पर लगातार मुझसे फ़ोन पर संपर्क तो रखते थे किन्तु उनका फ़ोन हमेशा उनके ...

मेरे घर आना ज़िंदगी - 18
by Santosh Srivastav
  • 45

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (18) दिल्ली में मौलिक काव्य सृजन द्वारा कृष्ण काव्य सम्मान 20 अक्टूबर को मिलना था । कार्यक्रम के आयोजक सागर सुमन ने ...

मेरे घर आना ज़िंदगी - 17
by Santosh Srivastav
  • 72

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (17) सूने घर का पाहुना ज्यूँ आया त्यूँ जाव औरंगाबाद पहुंचकर प्रमिला से लिपट खूब रोई । सब कुछ खत्म । हेमंत...... ...

पके फलों का बाग़ - 4
by Prabodh Kumar Govil
  • 438

मुझे रशिया देखने का चाव भी बहुत बचपन से ही था। इसका क्या कारण रहा होगा, ये तो मैं नहीं कह सकता पर मेरे मन में बर्फ़ से ढके ...

पके फलों का बाग़ - 3
by Prabodh Kumar Govil
  • 351

क्या मैं दोस्तों की बात भी करूं? एक ज़माना था कि आपके दोस्त आपकी अटेस्टेड प्रतिलिपियां हुआ करते थे। उन्हें अटेस्ट आपके अभिभावक करते थे। वो एक प्रकार से ...

પડદા પાછળના કલાકાર - ૩
by MILIND MAJMUDAR
  • 276

રંગમંચથી કારાગાર સુધી: રવિન્દ્ર કૌશિકશ્રી ગંગાનગર રાજસ્થાન મરુભૂમિથી ઘેરાયેલા આ નગરના ટાઉનહૉલમાં કોઈકનાટક ચાલી રહ્યું હતું. ચીનના  લશ્કરના હાથે જીવિત પકડાયેલા એક ભારતીય મેજર કોઈ પણ ગુપ્ત બાતમી આપવાનો ...

मेरे घर आना ज़िंदगी - 16
by Santosh Srivastav
  • 150

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (16) किसी से मिलना बातें करना, बातें करना अच्छा लगता है। लेकिन ज़िंदगी इतनी आसान कहाँ! वह तो वीराने में फैला हुआ ...

पके फलों का बाग़ - 2
by Prabodh Kumar Govil
  • 300

लो, इधर तो मैं फ़िर से अपने गुज़रे हुए बचपन में लौट रहा था, उधर मेरे इस यज्ञ में घर के लोग भी आहूति देने लगे। मुझे मेरी बेटी ...

मेरे घर आना ज़िंदगी - 15
by Santosh Srivastav
  • 198

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (15) जब राजस्थानी सेवा संघ की स्वर्ण जयंती भाईदास हॉल में मनाई जा रही थी तब माया गोविंद और गोविंद जी से ...

મેરી કહાની મેરી ડિજિટલી ઝુબાની - ભાગ-૨ - ૦૨ ફેબ્રુઆરી ૨૦૨૦
by Manthan Thakkar
  • 246

હેલો મિત્રો કેમ છો બધા? આજે ફેબ્રુઆરી મહિના નો પ્રથમ રવિવાર પણ એના કરતા પણ મહત્વની વાત એ આજ ની તારીખ ૦૨-૦૨-૨૦૨૦ કેટલી સરસ તારીખ છે નહિ એને આગળ ...

पके फलों का बाग़ - 1
by Prabodh Kumar Govil
  • 543

बाग़ के फल अब पकने लगे थे। लेकिन माली भी बूढ़ा होने लगा। माली तो अब भी मज़े में था, क्योंकि बूढ़ा होने की घटना कोई एक अकेले उसी ...

जीवन जगण्याची कला - भाग 2
by Maroti Donge
  • 1k

    जीवन जगण्याची कला आहे आपण अंगीकारली पाहिजे. कारण आपल्यात असे प्रसंग येतात. त्यांचा आपण विचारही करू शकत नाही.         आजच्या जीवनात अनेक संकटे दिसतात. त्यांचा ...

मेरे घर आना ज़िंदगी - 14
by Santosh Srivastav
  • 228

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (14) इसी वर्ष नमन प्रकाशन ने सुरेंद्र तिवारी के संपादन में 20वीं सदी की महिला कथाकारों की 10 खंडों में कहानियां छापी। ...

પડદા પાછળના કલાકાર - ૨ - એક‌‌ સજ્જન જાસૂસ: રામેશ્વરનથ‌ કાઓ
by MILIND MAJMUDAR
  • 660

        એક સજ્જન જાસૂસ : રામેશ્વરનાથ કાઓએનું અસ્તિત્વ છે છતાં પણ નથી અને નથી છતાં પણ છે.વાત છે દિલ્હીના લોદી રોડ પર  આવેલી એક ઇમારતની - ...

વેલવિશર
by Setu
  • 204

                                વેલવિશર                  એક મંચ પર ઉભેલ અમે બે ખબર નહિ ક્યારે એકબીજાના જીવનભરના ...

मेरे घर आना ज़िंदगी - 13
by Santosh Srivastav
  • 291

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (13) थक चुकी थी। चाहती थी किसी शांत पहाड़ी जगह जाकर गर्मियां बिताऊँ। अपने अधूरे पड़े उपन्यास "लौट आओ दीपशिखा" को भी ...

मेरे घर आना ज़िंदगी - 12
by Santosh Srivastav
  • 216

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (12) आलोक भट्टाचार्य नवोदित लेखिका सुमीता केशवा की किताब एक पहल ऐसी भी का लोकार्पण हेमंत फाउंडेशन के बैनर तले कराना चाहते ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 19 - अंतिम भाग
by Prabodh Kumar Govil
  • 696

( उन्नीस - अंतिम भाग) मेरे पिता मेरे साथ बस मेरी पच्चीस वर्ष तक की आयु तक रहे, फ़िर दुनिया छोड़ गए। मेरी मां मेरे साथ मेरी तिरेसठ वर्ष ...

तिरुपति बालाजी का वो यादगार प्रवास
by Keyur Shah
  • 555

नमस्कार मित्रों,मेरे जीवन में अब तक बहुत सारे अनुभव हुए हैं, जिन्हें याद करके मन रोमांचित हो जाता है, मैं इन अनुभवों को आपके साथ साझा करने का विचार ...

मेरे घर आना ज़िंदगी - 11
by Santosh Srivastav
  • 360

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (11) हेमंत की मृत्यु के बाद मेरी बर्बादी के ग्रह उदय हो चुके थे । मीरा रोड का घर हेमंत के बिना ...

मेरे घर आना ज़िंदगी - 10
by Santosh Srivastav
  • 303

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (10) चर्चगेट स्थित इंडियन मर्चेंट चेंबर का सभागार बुक कर लिया । शैलेंद्र सागर, विभूति नारायण राय, काशीनाथ सिंह, भारत भारद्वाज सब ...

પડદા પાછળના કલાકાર અજિત ડોવાલ: એક ઝલક
by MILIND MAJMUDAR
  • 1.1k

             પડદા પાછળના 'કલાકાર'            અજિત ડોવાલ: એક ઝલક   જૂઠું બોલે છે, સ્વાંગ રચે છે,કાવાદાવા કરે છે , ષડયંત્રો ઘડે ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 18
by Prabodh Kumar Govil
  • 684

( 18 )मैंने देखा था कि जब लोग नौकरी से रिटायर होते हैं तो इस अवसर को किसी जश्न की तरह मनाते हैं। ये उनकी ज़िंदगी के जीविकोपार्जन के ...

જવાબદારી નું ભાન
by Trivedi Ankit
  • 316

અરે ભગવાન આજે પાછુ નવું તોફાન કર્યું આ છોકરાએ એવી બૂમ પાડતી રુક્મિણી ચિંતા સાથે તેના પતિ ને કહેવા બહારની રૂમમાં આવી,  કેમ શું થયું એવું કહેતા કેશવભાાઈ  શોફા ...

मेरे घर आना ज़िंदगी - 9
by Santosh Srivastav
  • 396

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (9) विरार के फ्लैट का लोन पटाने में दिक्कतें आ रही थीं इसलिए हमने मीरा रोड सृष्टि कॉन्प्लेक्स में निर्मल टॉवर की ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 17
by Prabodh Kumar Govil
  • 630

( सत्रह )हैदराबाद में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। मैं विमान यात्रा से वहां पहुंचा। किन्तु जब विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस जा रहा था तभी मेरे मेज़बान के पास ...

The unforgettable tour of Tirupati Balaji
by Keyur Shah
  • 345

For the last several years, I have been traveling to Chennai (southern India) for an annual business trip. Each year I visited Chennai, I always made it a point ...

मेरे घर आना ज़िंदगी - 8
by Santosh Srivastav
  • 465

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (8) समय बीतता गया। एक दिन अचानक श्रीकांत जी (बाबा नागार्जुन के पुत्र जो अब यात्री प्रकाशन संभालते हैं) का फोन आया ...

जीवन जगण्याची कला भाग - १
by Maroti Donge
  • 2.3k

       जीवन कशाप्रकारे जगावे आणि कशी जगू नये. ही एक अशी कला आहेत. ती सहजासहजी समजत नाही, म्हणून मी काही बाबी सांगण्याचा प्रयत्न करत आहे.      ...

मेरे घर आना ज़िंदगी - 7
by Santosh Srivastav
  • 1.8k

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (7) मेरे लिए मेरे जीवन में आया एक एक व्यक्ति भविष्य के लिए मेरी आँखें खोलता गया फिर चाहे आँखें उससे मिले ...