कथाकार- नाटककार रंग समीक्षक हृषीकेश सुलभ का जन्म 15 फरवरी को बिहार के सिवान जनपद के लहेजी नामक गाँव में हुआ। आरंभिक शिक्षा गाँव में हुई आपकी कहानियां विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में प्रकाशित और अंग्रेजी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं। आप रंगमंच से गहरा जुड़ाव के कारण तथा-लेखन के साथ-साथ नाट्य-लेखन को ओर उन्मुख हुए और भिखारी ठाकुर की प्रसिद्ध नाट्यशैली बिदेसिया की रंग युक्तियों का आधुनिक हिन्दी रंगमंच के लिए पहली बार अपने नाटकों के आलेख में सृजनात्मक प्रयोग किया। विगत कुछ वर्षों से आप कथादेश मासिक रंगमंच पर नियमित लेखन कर रहे हैं। आपकी प्रकाशित कृतियाँ है : अग्निलीक (उपन्यास) तूती की आवाज (पथरकट, वधस्थल से छलांग और बँधा है कल एक जिल्द में शामिल), हलन्त, वसंत के हत्यारे (कहानी-संग्रह); प्रतिनिधि कहानियाँ, संकलित कहानियां(चयन): अमली, बटोही, धरती आबा (नाटक); माटीगाड़ी (शूद्रक रचित मृच्छकटिकम् की पुनर्रचना), मैला आँचल (फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यास का नाट्यरूपांतरण), दालिया (रवीन्द्रनाथ टैगोर की कहानी पर आधारित नाटक); 'रंगमंच का जनतंत्र' और 'रंग अरंग' (नाट्य-चिंतन)। संपर्क : पीरमुहानी, मुस्लिम कब्रिस्तान के पास कदमकुआं,पटना-800003