अध्याय 1 : बारह बजने से पहलेसर्दियों की उस रात शहर रंग-बिरंगी रोशनियों में नहा रहा था। हर सड़क ...
अध्याय–4 : अधूरी इच्छाएँ रविवार की सुबह थी। आज महेश घर पर था। उमा ने सोचा, शायद आज ...
अध्याय–3 : चैट की आदत कहते हैं कि मनुष्य किसी भी आदत का बंदी बन सकता है। किसी ...
अध्याय–2 : एक घर, जहाँ सन्नाटा रहता है सुबह के छह बजे थे। अलार्म बजने से कुछ क्षण ...
भीड़ में अकेलीअध्याय–1 : एक अनजान संदेश रात के साढ़े दस बज रहे थे। शहर की ऊँची इमारतों ...
उसने झुककर गुलाब का एक फूल आगे बढ़ाया और अपने दिल पर हाथ रखकर मुस्कुराते हुए कहा—"I love you."उमा ...
मछलीवाली "मच्छी लेलो मच्छी......... । " उमा जोर से हांका लगाती हुई मछली बाज़ार से निकल कर बस्ती की ...
सुभम एक कंपनी में काम करता है। हंसमुख, सरल और कर्तव्यनिष्ठा के कारण जाना जाने वाला सुभम अपने आफिस ...
उमा को आज अचानक ही अनिल मिल गया। ये उसके साथ कालेज में पढ़ता था। उमा से अक्सर उसकी ...
Evening was falling. The chill in the air was sharp, the winds howling fiercely. Drawn by a craving for ...