Alok Mishra Books | Novel | Stories download free pdf

बारह बजे के बाद - 1

by Alok Mishra
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अध्याय 1 : बारह बजने से पहलेसर्दियों की उस रात शहर रंग-बिरंगी रोशनियों में नहा रहा था। हर सड़क ...

भीड़ में अकेली - 4

by Alok Mishra
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अध्याय–4 : अधूरी इच्छाएँ रविवार की सुबह थी। आज महेश घर पर था। उमा ने सोचा, शायद आज ...

भीड़ में अकेली - 3

by Alok Mishra
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अध्याय–3 : चैट की आदत कहते हैं कि मनुष्य किसी भी आदत का बंदी बन सकता है। किसी ...

भीड़ में अकेली - 2

by Alok Mishra
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अध्याय–2 : एक घर, जहाँ सन्नाटा रहता है सुबह के छह बजे थे। अलार्म बजने से कुछ क्षण ...

भीड़ में अकेली - 1

by Alok Mishra
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भीड़ में अकेलीअध्याय–1 : एक अनजान संदेश रात के साढ़े दस बज रहे थे। शहर की ऊँची इमारतों ...

प्रेम

by Alok Mishra
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उसने झुककर गुलाब का एक फूल आगे बढ़ाया और अपने दिल पर हाथ रखकर मुस्कुराते हुए कहा—"I love you."उमा ...

मछलीवाली

by Alok Mishra
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मछलीवाली "मच्छी लेलो मच्छी......... । " उमा जोर से हांका लगाती हुई मछली बाज़ार से निकल कर बस्ती की ...

दोस्ती

by Alok Mishra
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सुभम एक कंपनी में काम करता है। हंसमुख, सरल और कर्तव्यनिष्ठा के कारण जाना जाने वाला सुभम अपने आफिस ...

गाठें

by Alok Mishra
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उमा को आज अचानक ही अनिल मिल गया। ये उसके साथ कालेज में पढ़ता था। उमा से अक्सर उसकी ...

Counterfeit Coin

by Alok Mishra
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Evening was falling. The chill in the air was sharp, the winds howling fiercely. Drawn by a craving for ...