बाबा भाग 2 सुबह के पाँच बज चुके थे। शहर धीरे-धीरे जाग रहा था। आसमान में हल्की लालिमा थी, जैसे सूरज ने पर्दे के पीछे से झांककर दुनिया को पुकारा हो।गली के कोने पर चायवाले की केतली से उठती भाप, सड़क पर सफाई कर्मचारी की झाड़ू की खट-खट, और दूधवाले की घंटी — जीवन शुरू हो चुका था।लेकिन राहुल के बेडरूम में अब भी अंधेरा पसरा था। नींद, थकान और जिम्मेदारियों के बोझ से उसका शरीर मानो बिस्तर से चिपका हुआ था।क्लॉक 6:30 दिखा रही थी, तभी ट्रिन-ट्रिन-ट्रिन — अलार्म जोर से बजा।राहुल ने करवट बदली और फोन बंद किया। उसकी