श्रापित एक प्रेम कहानी - 48

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चट्टान सिंह की बात सुनकर दक्षराज बहुत घबरा जाता है़ और फोन को काट देता है। दक्षराज अपना सिर पकड़कर सौचने लगता है ---> मुझे अब जल्दी से जल्दी अघोर बाबा की कहे अनुसार अपना कार्य पुरा करना होगा। क्योकीं जन्माष्टी मे अब बस कुछ ही दिन बचे हैं। मुझे साधना के लिए उचित सामग्री का व्यवस्था कर लेनी होगी। क्योकीं अब कुम्भन भी मेध और सांतक दौनो मणि का खोज मे लग गया है वो कुंम्भन मुझ तक पहुंचे इससे पहले मैं अपना कार्य पूरा कर लुगां। दक्षराज के इतना सौचते ही वहां पर दयाल आ जाता है । दयाल