hindi Best Spiritual Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


Languages
Categories
Featured Books

श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 33 By Shiv putri

श्री भगवान से बात कर रही थी... वहां हरि ने सारी बात सीता जी को बताई ....हरि— माँ.. माँ आज श्री ने मेरी बात मान ली, आज उसने हाँ कह दी सीता जी— क्या किस बात की हाँ क्या हो गया ?हरि —...

Read Free

कालू की पहाड़ी - 16 By RAAHULL SHARMA

कालू की आवाज़ किसी फटे हुए नगाड़े की तरह गूँजी। उसका क्रोध अब सातवें आसमान पर था। उसकी काली छाया के भीतर से बिजली जैसी लपटें निकलने लगीं।"बता कार्तिक! कौन है वह जिसने प्रेमचंद बनकर...

Read Free

प्रतीकोपासना - भाग 1 By kalpesh

प्रतीकोपासना   स्वप्रतीक से आत्मज्योति की ओरभाग १ : प्रतीक का दर्शन और साधना का प्रारंभशिवसंहिता के इस प्रसंग में योग की एक विशिष्ट साधना का वर्णन मिलता है, जिसे प्रतीकोपासना कहा ग...

Read Free

जप मंत्र का वास्तविक अर्थ क्या है? By yeash shah

_जप मंत्र का वास्तविक अर्थ क्या है?_ उत्तर : श्रीकृष्ण गीता में यह कहते है कि मंत्रों में जप मंत्र मेरा ही स्वरूप है। जप का अर्थ है नित्य अपने अंतर में किसी एक विशेष संकल्प को दोहर...

Read Free

क्या भाग्य सच में होता है? By Nitya Oswal

हाँ, भाग्य है; वह सच में है! भाग्य कैसे सच है यह जानने के लिए, आइए वास्तविक जीवन के कुछ उदाहरण देखते हैं, शुरुआत आपके 'खुद' के जीवन से करते हैं। भाग्य के वास्तविक जीवन के उ...

Read Free

रामायण हमें क्या सिखाती है? By Skp divine

रामायण हमें क्या सिखाती है?एक महान ग्रंथ, जो मनुष्य को प्रेम, मर्यादा और धर्म का मार्ग दिखाता हैरामायण केवल एक प्राचीन कथा नहीं है।यह भारतीय संस्कृति की उन महान आध्यात्मिक और साहित...

Read Free

सत्य की ज्ञान-यात्रा - अध्याय 1 By Chandni choudhary

सत्य की ज्ञान-यात्राअभ्यनव और गुरुदेव वाजदेव ऋषि की दार्शनिक कथावन की शांत गोद में गुरुदेव वाजदेव ऋषि अपनी कुटिया के बाहर ध्यानमग्न बैठे थे। संध्या का समय था। सूर्य धीरे-धीरे अस्ता...

Read Free

विष्णु परिवार: जीवन शैली - 4 By Shivam Kumar Pandey

हम सभी विष्णु सरनेम के लोग, सनातन धर्म के अनुयायी हैं, और और हम हिंदुओं से अलग नहीं बल्कि हम भी हिंदू हैं । किसी भी प्रकार से हम हिंदुओं से अलग नहीं हैं ।परिचयभारत एक प्राचीन और मह...

Read Free

तीन समस्याएं, पीड़ा का कारण और निवारण। By yeash shah

समाज की तीन समस्याएं और पीड़ा का कारण।(अ) घर में लगातार बीमारी रहना और मेडिकल का खर्च।(ब) प्रगतिशील व्यवसाय या नौकरी का अचानक कम या बंद हो जाना।(क) रिश्तों में मनभेद और अलग हो जाने...

Read Free

गरीब किसान की मेहनत और राम की लगन By Tejpal Singh Meena

मोहन एक गरीब परिवार का सीधा वक्ति हैं वह उत्तर प्रदेश मुरादाबाद के एक छोटे से गांव अमरपुर में रहता है मोहन के परिवार में चार सदस्य रहते हैं उसकी पत्नी सरोज जो घर का सारा काम करती ह...

Read Free

मेरा काम हो गया - एक जागृति कथा By prem chand hembram

पुरुलिया जिले के रूकनी गाँव के समीप हारु कमार का घर था। मिट्टी की दीवारें, फूस की छत और बाँस का दरवाजा—बस यही उसकी गृहस्थी की पहचान थी।बात सन 1976 की है।हारु ने जब से होश सँभाला, त...

Read Free

श्रोत्रं यज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(14) की व्याख्या "श्रोत्रंयज्ञेन कल्पताम्"यजुर्वेद--11/81भावार्थ--हमारे कान शुभ वचनों को ग्रहण करने वालेबनें।वेदों में प्रमाण--“हमारे कान शुभ/कल्याणकारी वचन सुनें और...

Read Free

शिक्षा स्मृति है, शास्त्र संकेत है, दृष्टि बोध है। By Vedanta Life Agyat Agyani

  शिक्षा स्मृति है, शास्त्र संकेत है, दृष्टि बोध है।जब मन कहता है—“कृष्ण ऐसे थे।”“बुद्ध ऐसे थे।”“राम ऐसे थे।”तो वह प्रायः इतिहास, स्मृति और किसी दूसरे के अनुभव को दोहरा रहा होता है...

Read Free

मैं हूँ - लेकिन कर्ता नहीं By Vedanta Life Agyat Agyani

  0 — कर्ता का अंत, होना शेष0 केवल शांति नहीं है।0 केवल विचारों का रुक जाना नहीं है।0 केवल ध्यान में बैठ जाना नहीं है।0 का मूल अर्थ है—कर्ताभाव का गिर जाना।मैं हूँ।बस हूँ।बाकी सब ह...

Read Free

उत्तर बेचने वाले गुरु और खोता हुआ प्रश्न By Vedanta Life Agyat Agyani

  उत्तर बेचने वाले गुरु और खोता हुआ प्रश्नआज आध्यात्मिक बाजार में एक विचित्र स्थिति दिखाई देती है—प्रश्न भी गुरु पैदा करता है और उसका उत्तर भी गुरु ही देता है।पहले वह तुम्हारे भीतर...

Read Free

अमृत वाणी - संत वाणी - 21 By Nitya Oswal

हम अक्सर सोचते हैं कि बहुत बड़े-बड़े धार्मिक अनुष्ठान कर लेना, शरीर पर विशेष तरह के तिलक लगा लेना, या दिन-भर केवल मंदिर-मस्जिद के चक्कर काट लेना ही सबसे बड़ी भक्ति है। हम बाहर से त...

Read Free

चक्षुर्यज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सू्क्ति(13) की व्याठ्या"चक्षुर्यज्ञेन कल्पताम्"यजुर्वेद --11/84भावार्थ --हे ईश्वर ! हमारी दृष्टि पवित्र और सत्यदर्शी बने।मंत्रचक्षुर्यज्ञेन कल्पताम्।— यजुर्वेद 11.84भावार्...

Read Free

दान अर्थात् क्या? उसका महत्त्व क्या है? By Nitya Oswal

दान यानी औरों को अपना खुद का कुछ भी देकर उन्हें सुख देना वह।किसी भी दूसरे जीव को, चाहे वो मनुष्य हो या दूसरे कोई प्राणी, उन्हें सुख देना वह दान कहलाता है। हमारे पास जो भी है, उसे द...

Read Free

सत्य की खोज : मनुष्य सृष्टि और आत्मबोध By Chandni choudhary

सत्य की खोज : मनुष्य, सृष्टि और आत्मबोधएक दार्शनिक चिंतनलेखिका — चाँदनीजन्म से मृत्यु तक चलने वाली इस यात्रा में मनुष्य असंख्य कर्म करता है। वह हँसता है, रोता है, प्रेम करता है, सं...

Read Free

मृत्यु के बाद क्या होता है ? By Nitya Oswal

मृत्यु के बाद आत्मा एक देह छोड़ता है और दूसरी तरफ़ जहाँ पिता का वीर्य और माता का रज दोनों के इकट्ठा होने का संजोग हो वहाँ सीधे ही गर्भ में प्रवेश करता है। तो हमें प्रश्न होता है कि न...

Read Free

श्री कृष्ण का चमत्कार By Anamika

एक बार की बात है। एक  गाँव में 1 वृद्ध आदमी रहता था वो दिल का बहुत साफ था। वो कभी भी किसी से नहीं लड़ता था। उसका नाम राम था।   वो बिल्कुल अपने नाम जैसा ही था शांत धैर्यवान मीठे स्व...

Read Free

प्राणोयज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (12) की व्याख्याप्राणोयज्ञेन कल्पताम्यजुर्वेद --11/8,4भावार्थ --हे ईश्वर! हमारे प्राण बलिष्ठ हों।वेदों में प्रमाण--"प्राणो यज्ञेन कल्पताम्" (यजुर्वेद 11.83) का भाव...

Read Free

आयुर्यज्ञेन कल्षताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(11) की व्याख्या "आयुर्यज्ञेन कल्पताम्"यजुर्वेद--11/84भावार्थ--हे ईश्वर! हमारी आयु श्रेष्ठ बने। यजुर्वेद 11/84 (कुछ पाठ-परंपराओं में क्रमांकन भिन्न हो सकता है) का पू...

Read Free

ऊर्जं नः धेहि By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (10) की व्याख्या"ऊर्जं नः धेहि"यजुर्वेद --11/83भावार्थ -- हे ईश्वर! हमें शक्ति प्रदान करें। पूरा मंत्र अर्थ सहित।यजुर्वेद 11.83 का मंत्र (वाजसनेयी संहिता) इस प्रकार...

Read Free

विद्या और अविद्या By Kapil Tiwari

“विद्या और अविद्या किसको कहते हैं?” तो बड़ा सारगर्भित और संक्षिप्त उत्तर देता है उपनिषद्: “अहंभाव की जन्मदात्री अविद्या है और जिसके द्वारा अहंभाव समाप्त हो जाए, वही विद्या है।“-सर्व...

Read Free

प्र प्र दातारं तारिष By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (9) की व्याख्या"प्र प्र दातारं तारिष"यजुर्वेद --11/83भावार्थ --हे ईश्वर ! अन्न देने वाले की रक्षा करो। पूरा मंत्र अर्थ सहितशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन संहिता) अध्याय...

Read Free

ग्रहों का सहज स्वभाव। और आपकी FREE WILL. By yeash shah

                  ग्रहों का बाह्य प्रभाव संपूर्ण पृथ्वी पर होता है, परन्तु उनका आंतरिक प्रभाव मनुष्य के मस्तिष्क से लेकर उसकी नाभि तक समझाया गया है। मस्तिष्क प्रतिक्रिया और प्रतिबा...

Read Free

बचपन की मौलिकता और मौलिक प्रश्नों की मृत्यु By Vedanta Life Agyat Agyani

बचपन की मौलिकता और मौलिक प्रश्नों की मृत्यु   ​(वेदांत 2.0 का एक दृष्टिकोण)   ​मनुष्य जन्म के समय किसी धर्म, ईश्वर, आत्मा, स्वर्ग, नरक, मोक्ष, पाप या पुण्य की अवधारणा लेकर पैदा नही...

Read Free

रामायण - वेदांत 2.0 Life By Vedanta Life Agyat Agyani

  राम दुःखी नहीं थे, हमारी दृष्टि दुःखी है   रामायण - वेदांत 2.0  Life   दृष्टिर्बन्धनकारिणी, दृष्टिरेव विमोचिनी।यथा दृष्टिस्तथा सृष्टिः, यथा चेतना तथा गतिः॥     लोग कहते हैं कि रा...

Read Free

मार्ग अनेक हो सकते हैं, पर बोध एक है। By Vedanta Life Agyat Agyani

 मार्ग अनेक हो सकते हैं, पर बोध एक है।  सूत्र: एकोनशतं मार्गा बोधस्त्वेकः।मन्थनाद् विवेकः विवेकाद् बोधः।बोधे सर्वे मार्गाः कृतार्थतां यान्ति॥   परिचय -  वेदांत 2.0 धार्मिक और आध्या...

Read Free

अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 11 By Shivraj Bhokare

दोहा : 21कबीर माया तजी तो क्या भया, मान तजा नहीं जाय।मान बड़े मुनिवर गिले, मान सबन को खाय॥ कहानी: सोने का कमंडल और लंगोट का गौरवस्वामी विरक्तनंद ने जवानी में ही अपना आलीशान घर और भ...

Read Free

जीवन ही अंतिम सत्य By Vedanta Life Agyat Agyani

जीवन ही अंतिम सत्य जीवन ही ईश्वर है। जीवन से अलग कोई दूसरा ईश्वर, आत्मा या परमात्मा नहीं। जीवन स्वयं ही दिव्यता की अभिव्यक्ति है। जब जीवन को उसकी संपूर्ण गहराई में जिया जाता है, तब...

Read Free

अन्नस्य न: धेहि By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(8) की व्याख्य"अन्नस्य न‌: देहि"शुक्ल यजुर्वेद --11/83हे ईश्वर ! हमें उतम अन्न प्रदान करो। पूरा मंत्र अर्थ सहितशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन शाखा) के अध्याय 11, मंत्र 8...

Read Free

वयं राष्ट्रे जागृयाम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (7) की व्याख्या "वयं राष्ट्रे जागृयाम् पुरोहित:*यजुर्वेद --9/23भावार्थ--हम राष्ट्र की उन्नति और जागरूकता के लिए सदैव तत्पर रहें। जिस मंत्र का अंतिम भाग "वयं राष्ट्र...

Read Free

श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 33 By Shiv putri

श्री भगवान से बात कर रही थी... वहां हरि ने सारी बात सीता जी को बताई ....हरि— माँ.. माँ आज श्री ने मेरी बात मान ली, आज उसने हाँ कह दी सीता जी— क्या किस बात की हाँ क्या हो गया ?हरि —...

Read Free

कालू की पहाड़ी - 16 By RAAHULL SHARMA

कालू की आवाज़ किसी फटे हुए नगाड़े की तरह गूँजी। उसका क्रोध अब सातवें आसमान पर था। उसकी काली छाया के भीतर से बिजली जैसी लपटें निकलने लगीं।"बता कार्तिक! कौन है वह जिसने प्रेमचंद बनकर...

Read Free

प्रतीकोपासना - भाग 1 By kalpesh

प्रतीकोपासना   स्वप्रतीक से आत्मज्योति की ओरभाग १ : प्रतीक का दर्शन और साधना का प्रारंभशिवसंहिता के इस प्रसंग में योग की एक विशिष्ट साधना का वर्णन मिलता है, जिसे प्रतीकोपासना कहा ग...

Read Free

जप मंत्र का वास्तविक अर्थ क्या है? By yeash shah

_जप मंत्र का वास्तविक अर्थ क्या है?_ उत्तर : श्रीकृष्ण गीता में यह कहते है कि मंत्रों में जप मंत्र मेरा ही स्वरूप है। जप का अर्थ है नित्य अपने अंतर में किसी एक विशेष संकल्प को दोहर...

Read Free

क्या भाग्य सच में होता है? By Nitya Oswal

हाँ, भाग्य है; वह सच में है! भाग्य कैसे सच है यह जानने के लिए, आइए वास्तविक जीवन के कुछ उदाहरण देखते हैं, शुरुआत आपके 'खुद' के जीवन से करते हैं। भाग्य के वास्तविक जीवन के उ...

Read Free

रामायण हमें क्या सिखाती है? By Skp divine

रामायण हमें क्या सिखाती है?एक महान ग्रंथ, जो मनुष्य को प्रेम, मर्यादा और धर्म का मार्ग दिखाता हैरामायण केवल एक प्राचीन कथा नहीं है।यह भारतीय संस्कृति की उन महान आध्यात्मिक और साहित...

Read Free

सत्य की ज्ञान-यात्रा - अध्याय 1 By Chandni choudhary

सत्य की ज्ञान-यात्राअभ्यनव और गुरुदेव वाजदेव ऋषि की दार्शनिक कथावन की शांत गोद में गुरुदेव वाजदेव ऋषि अपनी कुटिया के बाहर ध्यानमग्न बैठे थे। संध्या का समय था। सूर्य धीरे-धीरे अस्ता...

Read Free

विष्णु परिवार: जीवन शैली - 4 By Shivam Kumar Pandey

हम सभी विष्णु सरनेम के लोग, सनातन धर्म के अनुयायी हैं, और और हम हिंदुओं से अलग नहीं बल्कि हम भी हिंदू हैं । किसी भी प्रकार से हम हिंदुओं से अलग नहीं हैं ।परिचयभारत एक प्राचीन और मह...

Read Free

तीन समस्याएं, पीड़ा का कारण और निवारण। By yeash shah

समाज की तीन समस्याएं और पीड़ा का कारण।(अ) घर में लगातार बीमारी रहना और मेडिकल का खर्च।(ब) प्रगतिशील व्यवसाय या नौकरी का अचानक कम या बंद हो जाना।(क) रिश्तों में मनभेद और अलग हो जाने...

Read Free

गरीब किसान की मेहनत और राम की लगन By Tejpal Singh Meena

मोहन एक गरीब परिवार का सीधा वक्ति हैं वह उत्तर प्रदेश मुरादाबाद के एक छोटे से गांव अमरपुर में रहता है मोहन के परिवार में चार सदस्य रहते हैं उसकी पत्नी सरोज जो घर का सारा काम करती ह...

Read Free

मेरा काम हो गया - एक जागृति कथा By prem chand hembram

पुरुलिया जिले के रूकनी गाँव के समीप हारु कमार का घर था। मिट्टी की दीवारें, फूस की छत और बाँस का दरवाजा—बस यही उसकी गृहस्थी की पहचान थी।बात सन 1976 की है।हारु ने जब से होश सँभाला, त...

Read Free

श्रोत्रं यज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(14) की व्याख्या "श्रोत्रंयज्ञेन कल्पताम्"यजुर्वेद--11/81भावार्थ--हमारे कान शुभ वचनों को ग्रहण करने वालेबनें।वेदों में प्रमाण--“हमारे कान शुभ/कल्याणकारी वचन सुनें और...

Read Free

शिक्षा स्मृति है, शास्त्र संकेत है, दृष्टि बोध है। By Vedanta Life Agyat Agyani

  शिक्षा स्मृति है, शास्त्र संकेत है, दृष्टि बोध है।जब मन कहता है—“कृष्ण ऐसे थे।”“बुद्ध ऐसे थे।”“राम ऐसे थे।”तो वह प्रायः इतिहास, स्मृति और किसी दूसरे के अनुभव को दोहरा रहा होता है...

Read Free

मैं हूँ - लेकिन कर्ता नहीं By Vedanta Life Agyat Agyani

  0 — कर्ता का अंत, होना शेष0 केवल शांति नहीं है।0 केवल विचारों का रुक जाना नहीं है।0 केवल ध्यान में बैठ जाना नहीं है।0 का मूल अर्थ है—कर्ताभाव का गिर जाना।मैं हूँ।बस हूँ।बाकी सब ह...

Read Free

उत्तर बेचने वाले गुरु और खोता हुआ प्रश्न By Vedanta Life Agyat Agyani

  उत्तर बेचने वाले गुरु और खोता हुआ प्रश्नआज आध्यात्मिक बाजार में एक विचित्र स्थिति दिखाई देती है—प्रश्न भी गुरु पैदा करता है और उसका उत्तर भी गुरु ही देता है।पहले वह तुम्हारे भीतर...

Read Free

अमृत वाणी - संत वाणी - 21 By Nitya Oswal

हम अक्सर सोचते हैं कि बहुत बड़े-बड़े धार्मिक अनुष्ठान कर लेना, शरीर पर विशेष तरह के तिलक लगा लेना, या दिन-भर केवल मंदिर-मस्जिद के चक्कर काट लेना ही सबसे बड़ी भक्ति है। हम बाहर से त...

Read Free

चक्षुर्यज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सू्क्ति(13) की व्याठ्या"चक्षुर्यज्ञेन कल्पताम्"यजुर्वेद --11/84भावार्थ --हे ईश्वर ! हमारी दृष्टि पवित्र और सत्यदर्शी बने।मंत्रचक्षुर्यज्ञेन कल्पताम्।— यजुर्वेद 11.84भावार्...

Read Free

दान अर्थात् क्या? उसका महत्त्व क्या है? By Nitya Oswal

दान यानी औरों को अपना खुद का कुछ भी देकर उन्हें सुख देना वह।किसी भी दूसरे जीव को, चाहे वो मनुष्य हो या दूसरे कोई प्राणी, उन्हें सुख देना वह दान कहलाता है। हमारे पास जो भी है, उसे द...

Read Free

सत्य की खोज : मनुष्य सृष्टि और आत्मबोध By Chandni choudhary

सत्य की खोज : मनुष्य, सृष्टि और आत्मबोधएक दार्शनिक चिंतनलेखिका — चाँदनीजन्म से मृत्यु तक चलने वाली इस यात्रा में मनुष्य असंख्य कर्म करता है। वह हँसता है, रोता है, प्रेम करता है, सं...

Read Free

मृत्यु के बाद क्या होता है ? By Nitya Oswal

मृत्यु के बाद आत्मा एक देह छोड़ता है और दूसरी तरफ़ जहाँ पिता का वीर्य और माता का रज दोनों के इकट्ठा होने का संजोग हो वहाँ सीधे ही गर्भ में प्रवेश करता है। तो हमें प्रश्न होता है कि न...

Read Free

श्री कृष्ण का चमत्कार By Anamika

एक बार की बात है। एक  गाँव में 1 वृद्ध आदमी रहता था वो दिल का बहुत साफ था। वो कभी भी किसी से नहीं लड़ता था। उसका नाम राम था।   वो बिल्कुल अपने नाम जैसा ही था शांत धैर्यवान मीठे स्व...

Read Free

प्राणोयज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (12) की व्याख्याप्राणोयज्ञेन कल्पताम्यजुर्वेद --11/8,4भावार्थ --हे ईश्वर! हमारे प्राण बलिष्ठ हों।वेदों में प्रमाण--"प्राणो यज्ञेन कल्पताम्" (यजुर्वेद 11.83) का भाव...

Read Free

आयुर्यज्ञेन कल्षताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(11) की व्याख्या "आयुर्यज्ञेन कल्पताम्"यजुर्वेद--11/84भावार्थ--हे ईश्वर! हमारी आयु श्रेष्ठ बने। यजुर्वेद 11/84 (कुछ पाठ-परंपराओं में क्रमांकन भिन्न हो सकता है) का पू...

Read Free

ऊर्जं नः धेहि By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (10) की व्याख्या"ऊर्जं नः धेहि"यजुर्वेद --11/83भावार्थ -- हे ईश्वर! हमें शक्ति प्रदान करें। पूरा मंत्र अर्थ सहित।यजुर्वेद 11.83 का मंत्र (वाजसनेयी संहिता) इस प्रकार...

Read Free

विद्या और अविद्या By Kapil Tiwari

“विद्या और अविद्या किसको कहते हैं?” तो बड़ा सारगर्भित और संक्षिप्त उत्तर देता है उपनिषद्: “अहंभाव की जन्मदात्री अविद्या है और जिसके द्वारा अहंभाव समाप्त हो जाए, वही विद्या है।“-सर्व...

Read Free

प्र प्र दातारं तारिष By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (9) की व्याख्या"प्र प्र दातारं तारिष"यजुर्वेद --11/83भावार्थ --हे ईश्वर ! अन्न देने वाले की रक्षा करो। पूरा मंत्र अर्थ सहितशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन संहिता) अध्याय...

Read Free

ग्रहों का सहज स्वभाव। और आपकी FREE WILL. By yeash shah

                  ग्रहों का बाह्य प्रभाव संपूर्ण पृथ्वी पर होता है, परन्तु उनका आंतरिक प्रभाव मनुष्य के मस्तिष्क से लेकर उसकी नाभि तक समझाया गया है। मस्तिष्क प्रतिक्रिया और प्रतिबा...

Read Free

बचपन की मौलिकता और मौलिक प्रश्नों की मृत्यु By Vedanta Life Agyat Agyani

बचपन की मौलिकता और मौलिक प्रश्नों की मृत्यु   ​(वेदांत 2.0 का एक दृष्टिकोण)   ​मनुष्य जन्म के समय किसी धर्म, ईश्वर, आत्मा, स्वर्ग, नरक, मोक्ष, पाप या पुण्य की अवधारणा लेकर पैदा नही...

Read Free

रामायण - वेदांत 2.0 Life By Vedanta Life Agyat Agyani

  राम दुःखी नहीं थे, हमारी दृष्टि दुःखी है   रामायण - वेदांत 2.0  Life   दृष्टिर्बन्धनकारिणी, दृष्टिरेव विमोचिनी।यथा दृष्टिस्तथा सृष्टिः, यथा चेतना तथा गतिः॥     लोग कहते हैं कि रा...

Read Free

मार्ग अनेक हो सकते हैं, पर बोध एक है। By Vedanta Life Agyat Agyani

 मार्ग अनेक हो सकते हैं, पर बोध एक है।  सूत्र: एकोनशतं मार्गा बोधस्त्वेकः।मन्थनाद् विवेकः विवेकाद् बोधः।बोधे सर्वे मार्गाः कृतार्थतां यान्ति॥   परिचय -  वेदांत 2.0 धार्मिक और आध्या...

Read Free

अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 11 By Shivraj Bhokare

दोहा : 21कबीर माया तजी तो क्या भया, मान तजा नहीं जाय।मान बड़े मुनिवर गिले, मान सबन को खाय॥ कहानी: सोने का कमंडल और लंगोट का गौरवस्वामी विरक्तनंद ने जवानी में ही अपना आलीशान घर और भ...

Read Free

जीवन ही अंतिम सत्य By Vedanta Life Agyat Agyani

जीवन ही अंतिम सत्य जीवन ही ईश्वर है। जीवन से अलग कोई दूसरा ईश्वर, आत्मा या परमात्मा नहीं। जीवन स्वयं ही दिव्यता की अभिव्यक्ति है। जब जीवन को उसकी संपूर्ण गहराई में जिया जाता है, तब...

Read Free

अन्नस्य न: धेहि By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(8) की व्याख्य"अन्नस्य न‌: देहि"शुक्ल यजुर्वेद --11/83हे ईश्वर ! हमें उतम अन्न प्रदान करो। पूरा मंत्र अर्थ सहितशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन शाखा) के अध्याय 11, मंत्र 8...

Read Free

वयं राष्ट्रे जागृयाम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति (7) की व्याख्या "वयं राष्ट्रे जागृयाम् पुरोहित:*यजुर्वेद --9/23भावार्थ--हम राष्ट्र की उन्नति और जागरूकता के लिए सदैव तत्पर रहें। जिस मंत्र का अंतिम भाग "वयं राष्ट्र...

Read Free