अध्याय — जीवन को समझना नहीं, देखना क्यों जरूरी है? (जीवन का प्रत्यक्ष विज्ञान-दर्शन — वेदांत 2.0) मनुष्य जीवन को समझना चाहता है।वह शब्द बनाता है, सिद्धांत बनाता है, दर्शन बनाता है। लेकिन समझ और देखना एक नहीं हैं। 1️⃣ समझ मन की प्रक्रिया है समझ विचार से बनती है। तुलना विश्लेषण निष्कर्ष इनसे मन को लगता है कि उसने जीवन पकड़ लिया। लेकिन यह केवल मानसिक नक्शा है — जीवन नहीं। 2️⃣ देखना प्रत्यक्ष अनुभव है देखना मतलब: बिना धारणा बिना निष्कर्ष बिना पहले से तय अर्थ जीवन को जैसे है वैसे देखना। यहाँ मन थोड़ी