वृक्ष वाणी : पर्यावरण सिद्धों का उदय - 1

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अध्याय 1: स्वर्णिम प्रभात मलनाड की सुबह हमेशा खास होती है। जब कोहरे की चादर को चीरकर सूर्य की पहली किरणें धरती पर आती हैं, तो दुनिया किसी जादुई सपने जैसी लगती है। लेकिन अर्जुन के लिए, यह एक अलग ही दुनिया थी।घड़ी में छह बजते ही उसकी आँखें खुल गईं। अभी भी नींद में था, अंगड़ाई लेते हुए वह उठा और खिड़की के पास जाकर पर्दा हटाया। बाहर अब भी घना कोहरा छाया हुआ था, लेकिन उसकी आँखों के लिए—उस साधारण कोहरे में एक अलग ही ब्रह्मांड तैर रहा था। सुनहरा। जीवंत। पेड़-पौधों के चारों ओर विभिन्न रंगों का एक