किरण की पलकें धीरे-धीरे खुलीं। शुरुआत में सब कुछ धुंधला और अस्पष्ट था। फिर धीरे-धीरे अर्जुन का चिंतित चेहरा साफ दिखाई देने लगा।"किरण! होश आ गया?" अर्जुन की आवाज़ में राहत की सांस थी।किरण धीरे से उठकर बैठ गया। उसका सिर अभी भी थोड़ा भारी था, लेकिन वह भयानक दर्द गायब हो चुका था। "क्या हुआ था? मुझे... मैं अब ठीक हूँ," उसकी आवाज़ में आश्चर्य था।अर्जुन ने अपने दोस्त के चेहरे को गौर से देखा। "तू बेहोश हो गया था। मैंने... मैंने तुझे पानी दिया। उसमें कुछ पत्तियां मसलकर मिलाई थीं।""पत्तियां?" किरण भ्रमित हो गया। "कौन सी पत्तियां?""मुझे नहीं