अगले दस सेकंड में सब कुछ बदल गया. चीखें, भागदौड, गोलियों की आवाज.कबीर अंदर घुसा. उसने सब तरफ तारा को ढूँढा और सीधा तारा के पास पंहुचा. उसने बिना रुके उसका हाथ पकडते हुए कहा.चलो,लेकिन तारा रुकी.अरुण भाग रहा था.नहीं, तारा ने कहा. आज नहीं।उसने बंदूक उठाई और अरुण की तरफ दौडी. गोली नहीं चलाई. उसने उसके पैर पर वार किया. अरुण गिर पडा.पुलिस सायरन की आवाज दूर से आने लगी.समीर गायब हो चुका था. रुद्राक्ष भी.लेकिन अरुण देशमुख जमीन पर था. जिंदा. गिरफ्तार.कुछ घंटे बाद, बेस में सन्नाटा था.कबीर की बाजू पर पट्टी थी. तारा सामने बैठी थी.तुमने नियम