अनंत यात्रा: सीढ़ियाँ, सत्य और मृत्यु का रहस्य

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ॐ vedanta 2 .0  life  अनंत यात्रा       सीढ़ियाँ, सत्य और मृत्यु का रहस्य "हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम्।तत्त्वं पूषन्नपावृणु सत्यधर्माय दृष्टये॥""हे पूषन्! सत्य का मुख सोने के पात्र (चमकदार आवरण) से ढका हुआ है। मुझ सत्य-धर्मी के लिए उसे हटा दें, ताकि मैं परम सत्य का दर्शन कर सकूँ।"— ईशावास्य उपनिषद्, १५ प्रस्तावना — शब्द और सत्य शब्द सत्य की ओर इशारा तो कर सकते हैं, पर वे स्वयं सत्य नहीं होते। जिस प्रकार प्यास शब्द लिखने से कंठ की तृष्णा नहीं बुझती, उसी प्रकार 'परमात्मा', 'ब्रह्म'