तभी संपूर्णा आलोक से धिरे से कहती है--> मैं अब संतुष्ट होने वाली हूँ । जिसे सुनकर आलोक की रफतार और तैज हो जाती है । संपूर्णा अपनी मुट्टा को कसके भीच लेती है और अपनी दौनो हाथो को आलोक के कमर पर कस के बांध दैती हे़ै। तभी आलोक भी कहता है। > संपूर्णा मैं भी चरम सिमा तक पहूँच चुका हूँ। आलोक के इतना कहते ही संपूर्णा आलोक को कस के पकड़ लेती है। और एक लम्बी चीख के साथ आलोक के होंट को चुमने लगती है तभी आलेक के मुह से भी एक चिख निकलता है और आलोक संपूर्णा को कस