(शाम का समय। हवेली के बाहर घंटी बजती है।)(दरवाज़ा खुलता है। पंडित जी हाथ में पुरानी, हल्की फटी हुई डायरी लिए खड़े हैं। चेहरे पर गंभीरता।)पंडित जी बोले - “राधिका बहू…आज जो लाया हूँ,वो इस घर की किस्मत बदल सकता है।”(राधिका और Mr. राणा चौंक जाते हैं।)(पंडित जी डायरी टेबल पर रखते हैं। कवर पर हल्के अक्षर— Suniti Thakur.)राधिका (धीमे स्वर में) बोली - “ये… सुनीति की डायरी?”पंडित जी (सिर हिलाते हुए) बोले - “हाँ।ये वही डायरी है जो वो मंदिर से उठाकर ले जा रही थीउस दिन…जब वो दृश्य और अदृश्य के बीच की किताब ले गई थी।”(कमरे में सन्नाटा।)(सुनीति और कौशिक