मूक वेदना की पुकार

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ईश्वर की इस सृष्टि में मनुष्य को केवल बुद्धि और वाणी ही नहीं मिली, उसे एक और अमूल्य उपहार मिला है - संवेदना। यही संवेदना मनुष्य को अन्य प्राणियों से अलग बनाती है। किंतु विडंबना यह है कि वही मनुष्य कभी-कभी उन आँखों की भाषा पढ़ना भूल जाता है, जिनमें शब्द नहीं होते, पर जीवन की असह्य पीड़ा ठहरी होती है। मैं यहाँ यह स्पष्ट कर देना चाहती हूँ कि मैं मांस खाने वालों के विरुद्ध नहीं हूँ, न ही किसी धर्म या परंपरा का विरोध करती हूँ। प्रत्येक व्यक्ति को अपने विश्वासों के साथ जीने का अधिकार है और