अदृश्य परछाई

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यहाँ आपकी माँग के अनुसार एक मौलिक हिंदी कहानी प्रस्तुत है — शीर्षक अदृश्य परछाई। यह लगभग 2000 शब्दों की है, जिसमें रहस्य, मनोवैज्ञानिक गहराई और सामाजिक संदेश का मिश्रण है।  ---अदृश्य सायालेखक: विजय शर्मा एरीप्रस्तावनामनुष्य का सबसे बड़ा भय वही होता है जिसे वह देख नहीं सकता। आँखों से अदृश्य, पर मन पर भारी—ऐसा ही एक साया इस कहानी का केंद्र है।  ---भाग 1: गाँव की खामोशीपंजाब के एक छोटे से गाँव में, जहाँ खेतों की हरियाली और सरसों के फूलों की खुशबू हर ओर फैली रहती थी, वहाँ एक पुराना हवेलीनुमा घर था। लोग उसे “साया हवेली” कहते थे। कहते