संकट का दौर

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यह कहानी केवल मनोरंजन और संदेश के लिए है इसका किसी वास्तविक व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं हैमुगल सल्तनत का समय था बादशाह अकबर का दरबार हर रोज की तरह सजा हुआ था दरबार में संगीत हंसी-मज़ाक और बुद्धिमानी की बातें होती थीं पूरे राज्य में शांति थी बाज़ार गुलजार थे और लोग अपनी-अपनी जिंदगी में खुश थे।सुबह होते ही बाजारों में चहल-पहल शुरू हो जाती थी। सब्ज़ी वाले आवाज़ लगाते ताज़ी सब्ज़ी ले लो सस्ती और बढ़ियाचाय की दुकानों पर लोग इकट्ठा होते हँसी-मज़ाक चलतारामू नाम का एक आम आदमी हर रोज़ 5 रुपये में बिस्किट और चाय