चेतन कहता है। गुरुदेव जब मैं हॉस्पिटल से भागकर दक्षराज के घर गया था । तब वहां पर मुझे घर के उपर बैठे दो पक्षीयों पर नजर पड़ी जो मुझे कोई साधारण पक्षी नही लगी। तो मैने अपनी शक्ती से उसके बारे मे पता लगाने की कोशीश की तो मुझे पता चला के वो कोई साधारण पक्षी नही बल्की देत्य है। देत्य का नाम सुनकर अघोरी कुछ दैर चुप रहता है। और फिर कहता है । देत्य ! ये दुसरा देत्य अब कहां से आ गया । कुंम्भन तो जंगल मे पड़ा है तो फिर ये दोनो पक्षी बने देत्य आखिर कौन