जिंदगी की दूसरे किनारा - 4

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जिंदगी की दसरे किनारा पार्ट 4वही है अब आधी रात के समय मेघाना बेचैन है एक हाथ सर पर रखते हुए लगातार सोच में डूबी हुई है  छत की तरफ देखते हुएसायद उसेसदमा लगा है उन अविश्वासी घटना का  उसने जो सड़कों पे देखा उसका दिमाग वही अटक गया है वह भरम में है उसे समझ में नहीं आ रहा है  कि वह क्या था इसीलिए  वो अब तिलक जाकर अपने बिस्तर पे लेटे हुए  उसकी छोटी सी कैमरा जिसमें कोई भी चीज़ अपनी जगह पर नहीं है कपड़े यहां वहां  खाने की चीज यहां वहां और यहां तक की काम की चीज यहां वहां पसरा हुआ हैऔर तभी वह पैनिंग करते हुए अपने सर पर