इंद्र को दिया चारित्र्य दानअत्याचारी हिरण्यकशिपु के अंत के पश्चात् प्रह्लाद को राजसिंहासन प्राप्त हुआ। वे तीनों लोकों में अपने सद्गुणों एवं उज्ज्वल चारित्र्य के कारण प्रसिद्ध हो गए। इसी कारण उन्हें अथाह शक्ति प्राप्त हुई, जिसके बल पर उन्होंने देवराज इंद्र को परास्त कर उनकी राजधानी अमरावती को अपने राज्य में मिला लिया। यह सब देवराज इंद्र के बढ़ते अभिमान को चूर करने के लिए हुआ था।अपनी पराजय होने व राज्य छिन जाने से दुःखी देवराज इंद्र गुरु बृहस्पति की शरण में जा पहुँचे। उन्होंने करबद्ध होकर गुरु बृहस्पति को प्रणाम किया और चिंतित स्वर में बोले, “गुरुदेव! यह