व्याख्या ऋगुवेद की

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ऋगुवेद सूक्ति--(61) की व्याख्या "बलं धेहि"ऋगुवेद --4/9/6भाव--शक्ति प्रदान करो।ऋग्वेद मण्डल 4, सूक्त 9, मन्त्र 6 का “बलं धेहि” पद अत्यन्त सारगर्भित है। मूल मन्त्र (ऋग्वेद 4/9/6)बलं धेहि तनूषु नो बलमिन्द्रानुत्सु नः।बलं तोकाय तनयाय जीवसे॥ पदच्छेद--बलम् = शक्ति, सामर्थ्यधेहि = धारण करो / प्रदान करोतनूषु = हमारे शरीरों मेंनः = हमें / हमारे लिएतोकाय = संतानों के लिएतनयाय = पुत्र/वंश के लिएजीवसे = जीवन के लिए भावार्थहे देव (विशेषतः इन्द्र)!हमारे शरीरों में शक्ति प्रदान करो,हमारे संघर्षों (युद्धों/कठिनाइयों) में शक्ति दो, हमारी संतानों और वंश के लिए भी जीवनदायिनी शक्ति दो। इसलिए “बलं धेहि” का संक्षिप्त अर्थ —“हमें शक्ति प्रदान करो” या “हममें बल स्थापित करो”