वरदान - 9

  • 783
  • 267

एक दिन वरदान गाँव के कुछ लड़कों के साथ कंचे खेल रहा था।हर बार की तरह वह अपनी दोनों मणियों से खेल रहा था और हर बाज़ी जीतता जा रहा था।बाकी लड़के हैरान थे—“अरे, ये कैसे हर बार जीत जाता है!”तभी एक लड़का अपने साथ अपने एक दोस्त को लेकर आया।वह लड़का गाँव का नहीं था—वह पास के नगर के एक जौहरी का बेटा था।उसकी नज़र जैसे ही वरदान के हाथ में उन मणियों पर पड़ी, वह एकदम ठिठक गया।उस दिन खेल ख़त्म होने के बाद वह जौहरी का बेटा सीधे अपने घर पहुँचा।उसका मन बेचैन था—वह बार-बार उन्हीं मणियों