कुंम्भन की बात सुनकर मांतक कहता है--> मित्र क्या ये संभव है के एक देत्य कन्या को किसी मानव द्वारा बंधक बना लिया गया हो। क्या इस युग मे भी ऐसे मानव है जो हम देत्यो से भी ज्यादा शक्तीशाली है ? कुंभ्मन कहता है --> पता नही मित्र। परतुं सत्य तो यही है के मुझे मेरी पुत्री इसी अवस्था मे मुझे यहां मिली थी । तो इसका अर्थ यही हुआ के के कोई शक्ती तो है जो मेरी पुत्री की शक्ती को पराजीत कर दिया है या छल किया है । कुंम्भन की बात को सुनकर त्रिजला कहती है---> अगर उस समय कालदामु