अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 1

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समर्पणउन सभी 'खोजी' मन को, जो भीड़ का हिस्सा बनने से इनकार करते हैं।और उन साहसी पाठकों को, जो सिर्फ मीठी बातें सुनने के शौकीन नहीं हैं, बल्कि सच सुनने का साहस रखते हैं।यह पुस्तक आपके भीतर के उस कबीर को समर्पित है, जो सदियों से सोया हुआ है। पाठकों के लिए एक ज़रूरी बात (Disclaimer):इस पुस्तक में संत कबीर के दोहों के साथ दी गई कहानियाँ ऐतिहासिक तथ्य नहीं, बल्कि लेखक द्वारा रचित 'बोध कथाएँ' हैं। कबीर का दर्शन शब्दों से ज़्यादा 'इशारों' में है। इन काल्पनिक कथाओं का निर्माण केवल इसलिए किया गया है ताकि उन गूढ़ इशारों को