अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 3

  • 93

दोहा: ५कबीर माया पापिणी, हरि सूँ करे हराम।मुखि कस्तूरी महमही, कुबधि कुहाड़ा काम॥कथा: "कस्तूरी का लालच"एक बार एक राहगीर जंगल से गुज़र रहा था। उसे अचानक कहीं से बहुत ही दिव्य और भीनी-भीनी खुशबू आई। वह राहगीर मंत्रमुग्ध हो गया। उसने सोचा, "जिस चीज़ की खुशबू इतनी प्यारी है, वह चीज़ कितनी कीमती होगी!"वह उस खुशबू के पीछे भागने लगा। रास्ते में काँटे लगे, उसके पैर लहूलुहान हो गए, उसने खाना-पीना छोड़ दिया, लेकिन वह खुशबू उसे और दूर खींचती रही। अंत में उसने देखा कि वह खुशबू उसकी अपनी ही झोली में रखे एक छोटे से कस्तूरी के टुकड़े