आचार्य गंधर्व ने करीब १९ साल के युवा राजकुमार के हाथ मे तलवार थमाते हुए अपने ऊपर प्रहार करने का आदेश दिया। वो युवा था यज्वपाल राजघराने का सदस्य, तनिष्क यज्वपाल जो सामने खड़े आचार्य के बार बार ललकारने के बावजूद अपनी जगह पर हाथ मे तलवार थामे कांपता हुआ खड़ा रहा।बगल में खड़े यज्वपाल राजघराने के दूसरे सदस्य जो कि शारिरिक बनावट और बल में तनिष्क से कई गुना बेहतर थे, तनिष्क को देखकर मन ही मन तरस खा रहे थे।आचार्य गंधर्व ने तनिष्क की तरफ चिल्लाते हुए कहा, "तनिष्क, तुम खुद तलवार नही चलाओगे तो अब मेरे प्रहार