शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर जीवन कोई ऐसी पहेली नहीं है जिसे बाहर की कोई सत्ता (धर्म, विज्ञान या राजनीति) सुलझा सके। यह एक बहती हुई धारा है, जिसका आनंद केवल 'अभी' और 'यहीं' लिया जा सकता है। जब हम अपने अहंकार की परतों को हटाकर, खंडित पहचानों को छोड़कर उस 'शून्य' पर खड़े होते हैं, तब हम अकेले नहीं होते—हम पूरे अस्तित्व के साथ एकाकार होते हैं। यही वह 'शून्य-बिंदु' है जहाँ से एक नया मनुष्य और एक सुंदर भविष्य जन्म लेता है। "अतीत का बीज गिर चुका है, भविष्य एक कल्पना है; केवल वर्तमान