बारिश अब भी हो रही थी…गंगा किनारे टूटी सीढ़ियों पर खड़ा कृष्णा भारी साँसें ले रहा था। उसकी मुट्ठी में अब भी लाल साड़ी का वो फटा हुआ टुकड़ा था…और तभी उसने उसे देखा।एक सफेद अनारकली वाली लड़की । थोड़ी दूर…एक लड़की खड़ी थी। सफेद अनारकली…खुले लंबे बाल…माथे पर हल्का सा तिलक…और हाथ में छोटा सा घड़ा। शायद वो गंगा से पानी भरने आई थी।कृष्णा हैरान क्योंकि वो हूबहू सिद्धिका जैसी दिखती थी। वही चेहरा…वही आँखें…वही मासूमियत…बस इस बार उसकी आँखों में लाल चमक नहीं थी। कृष्णा के होंठ काँप गए।वो बोला - स… सिद्धिका…वो लड़की उसे अजीब नज़रों से देखने