(फोन की लाइन पर एक अजीब सी 'Static' आवाज़—चर-चर की आवाज़। आर्यन कांपते हाथों से फोन पकड़े हुए है। बाहर बारिश रुक चुकी है, लेकिन सन्नाटा अब पहले से कहीं ज़्यादा भारी है।)वह अज्ञात आवाज़ अभी भी फोन पर थी। "मिस्टर मल्होत्रा, आपको लगा कि सब कुछ सुलझ गया? आपको लगा कि पिताजी का झूठ ही सब कुछ था? लेकिन ज़रा सोचिए... उस रात की बारिश में, जब माया को धक्का लगा था, तब पिताजी तो हॉल में थे और समीर को आपने घर से बाहर निकाल दिया था। तो फिर, माया को सीढ़ियों से नीचे किसने धकेला?"आर्यन की सांसें