पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 15

(16)
  • 627
  • 222

रात का जंगल…चारों तरफ घना अंधेरा फैला हुआ था। हवा इतनी तेज़ चल रही थी कि पेड़ों की शाखाएँ टूटने लगी थीं। कृष्णा अब भी राधा को अपनी बाँहों में उठाए भाग रहा था। उसकी साँसें तेज़ थीं…कपड़ों पर मिट्टी और खून लगा था… लेकिन उसकी पकड़ ढीली नहीं हुई। राधा काँप रही थी।राधा बोली - कृष्णा… मुझे डर लग रहा है…उसने पहली बार उसका नाम लिया।और ये सुनते ही कृष्णा एक पल के लिए रुक गया। उसकी आँखों में हल्की चमक आई…क्योंकि बहुत समय बाद उसे लगा जैसे सिद्धिका फिर से उसे पुकार रही हो । तभी राधा के सिर