मंदिर के अंदर अचानक एक गहरी खामोशी छा गई…दीपक की लौ भी जैसे थम गई हो।तभी मूर्ति के पास से एक गंभीर, गूंजती हुई आवाज़ आई—सिद्धिका को समाप्त करना होगा…तभी उसका दूसरा जन्म संभव है…।कृष्णा एकदम सन्न रह गया।उसके हाथ रुक गए…और आँखें मूर्ति पर टिक गईं।उसने धीमे से कहा -नहीं…सिद्धिका अब भी उसकी बाहों में थी…काँप रही थी…उसकी आँखों में डर और दर्द दोनों थे।वो बोली - कृष्णा… ये आवाज़…कृष्णा तुरंत बोला—नहीं…मैं तुम्हें नहीं खो सकता…उसकी आवाज़ टूट रही थी।वही दिव्य आवाज़ और भारी हो गई—यदि इसे नहीं रोका गया…तो यह संसार अंधकार में डूब जाएगा…।कृष्णा के अंदर तूफान चल