System King - किंग शर्मा

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“चयन की रात”रात असामान्य रूप से शांत थी।रुद्रनगर की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ था। किंग शर्मा अपनी छत पर खड़ा आसमान को देख रहा था। सितारे आज कुछ अलग चमक रहे थे, जैसे किसी रहस्य को छिपाए हों।“आज दिल अजीब सा क्यों लग रहा है…”किंग ने खुद से कहा।नीचे से माँ की आवाज़ आई—“किंग, देर हो रही है, अंदर आ जाओ।”“हाँ माँ…”किंग मुड़ा ही था कि अचानक—धड़ाम!आसमान फट पड़ा।नीली और लाल बिजली की लकीरें सीधे किंग के सामने गिरीं। हवा का दबाव इतना तेज़ था कि वह पीछे जा गिरा।“ये… ये क्या है?!”उसके सामने हवा में एक नीली पारदर्शी