Best Adventure Stories stories in hindi read and download free PDF

मैं चोर नही हूं - (पार्ट1)
by किशनलाल शर्मा
  • 552

"सबने अपनी अपनी कहानी सुना दी,"गबन के आरोप में सजा काट रहे देव ने जयराम के कंधे पर हाथ रखा था,"दोस्त तुम नही बताओगे तुम्हे कैसे यहाँ आना पड़ा?""यहां ...

रक्षक - 3
by Kayal King
  • 723

     रेमो का कवच का भेद       रेवन ने राजा से पूछा की आपकी बेटी को मतलब राजकुमारी को जो उठाकर ले गया है । उसकी सुरक्षा ...

दूरी न रहे कोई (अंतिम क़िस्त)
by किशनलाल शर्मा
  • 681

"तुमने अपने बारे मे सब कुछ तो बता दीया था।फिर और क्या जानने के लिए रह गया था?"इला की बात सुनकर राजन बोला।"मैने तुम्हे जो बताया वो झूठ भी ...

दूरी न रहे कोई ( पार्ट 3 )
by किशनलाल शर्मा
  • 795

"बोलो।""चाय पी लो।""तुम पी लो"राजन सोते हुए बोला"मैने तुम्हारे लिए भी बनाई है"और राजन को उठाना पड़ा।राजन चाय पीकर फिर सो गया था।इला चाय पीकर कुछ देर बैठी रही।फिर ...

दूरी न रहे कोई ( पार्ट 2 )
by किशनलाल शर्मा
  • 900

"ओ हो"राजन चाबी लेते हुए बोला,"चाबी वहां रह गई थी और मैं जेब मे ढूंढ रहा था।"राजन कार में बैठते हुए बोला,"आप भी आइए।"और   इला कार में आ बैठी।इला ...

दूरी न रहे कोई ( पार्ट 1)
by किशनलाल शर्मा
  • 1.3k

"क्या लेंगे आप?""तुम कौन हो?" दरमियाने  कद की युवती  को  अपने साामने खड़ा देखकर राजन बोला था।"मैं इस बार मे नौकरी करती हूँ"वह औरत बोली,"वेटर हूँ।""औरत होकर बार मे ...

पिनाक
by Rajeev Kumar
  • 1.7k

दिसंबर की भयंकर सर्दियां पड़ रही थी।  २० दिसंबर की सुबह वातावरण में अन्य दिनों की भांति बहुत ज्यादा सर्दी थी और कोहरा भी घना था।रुस्तम भाई का नियम ...

अस्थि-कलश
by Saroj Verma
  • 1.2k

कुछ सालों पहले की बात है,तब मेरी शादी नहीं हुई थी,मैं आगरा से झाँसी अपने घर जा रहा था,चूँकि मैं आगरा मैं एक प्राइवेट कम्पनी में जाँब करता था,दशहरे ...

जमानत
by किशनलाल शर्मा
  • 1.6k

"वकील साहब आप ही मुझे बचा सकते है,"गबरू नौजवान मेरे पैर पकड़कर गिड़गिड़ाया,"आपका बहुत नाम है।लोगों की सलाह पर ही मैं आपके पास आया हूँ।""पहले मुझे बताओ तो माजरा ...

हेतम सिपाही की हत्या
by राजनारायण बोहरे
  • 921

हेतम हेतम जो आरंभ से एंटी डकैती मूवमेंट टीम नम्बर सोलह का मैम्बर रहा और जिसने अब तक खूब बहादुरी और साहस दिखाया , अब हमारी पुलिस टुकड़ी में ...

काला जादू....
by Saroj Verma
  • 2.5k

कस्बे से बाहर एक तालाब था, वहां आए दिन आत्महत्या की वारदातें होतीं रहतीं थीं, क्योंकि तालाब बहुत गहरा था,जो भी उसमें मरने के लिए कूदता वो फिर कभी ...

वो बिल्ली...
by Saroj Verma
  • 1.8k

ये बात कोई दस पन्द्रह साल पुरानी है,तब मेरी उम्र यही कोई तीस पैंतीस साल रही होगी, मैं सरकारी अस्पताल में गायनोलोजिस्ट थी,मेरा उस कस्बे में नया नया तबादला ...

नेट की कल्पना
by Vijay Tiwari Kislay
  • 1.6k

नेट की कल्पना           राघव ग्रेजुएशन, कंप्यूटर के अनेक कोर्स और प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने के बाद भी अब तक बेरोजगार ही है। ऐसा नहीं है ...

प्यार भी इंकार भी (अंतिम भाग)
by किशनलाल शर्मा
  • 1.4k

"क्या प्यार का मतलब सिर्फ शादी ही है?"चारुलता ने प्रश्न किया था।"प्यार को सामाजिक सम्मान प्रदान करने के लिए शादी का प्रावधान है।विवाह मर्द और औरत को प्यार करने ...

अप्सराएं या परियां
by Shakti Singh Negi
  • 1.9k

अप्सराओं का बंदी   कुछ समय पहले की बात है. यह उत्तराखंड के एक गांव की बात है. उत्तराखंड के किसी गांव में एक बहुत कुशल संगीतकार रहता था. उसके ...

वो ख़्वाब था या हक़ीक़त......
by Saroj Verma
  • 2.1k

कभी कभी वो रात और वो मंज़र याद आता है तो मेरा दिल दहल उठता है आखिर वो क्या था?वो मह़ज मेरा कोई ख्वाब था या हक़ीक़त ,जिसे मैं ...

टकटक (केवल प्रबुद्ध वयस्कों के लिए)
by Pawan Kumar
  • 1.9k

Story Title: Taktak                                                  WITH PAWAN ...

भूख--एक औरत की व्यथा(अंतिम भाग)
by किशनलाल शर्मा
  • 2.6k

 थोड़ा सा बदलाव उसकी जिंदगी में आया था।सेठ ने उसे छ महीने तक रखैल बनाकर रखा और उससे जी भर जाने पर उसे बेच दिया था।वह एक आदमी से ...

पार - महेश कटारे - 4 - अंतिम भाग
by राज बोहरे
  • 1.2k

महेश कटारे - कहानी–पार 4                  बादल छँट जाने से सप्तमी का चन्द्रमा उग आया था। पार के किनारे धुँधले–से दिखाई देने लगे थे। तीनों उघाड़े होकर पानी ...

सजा---एक अनोखी प्रेम कथा
by किशनलाल शर्मा
  • 2.1k

दरोगा अनवर तैयार होकर थाने के लिए निकल पड़ा।घर से थाने तक का रास्ता सड़क से होकर लम्बा था।लेकिन एक छोटा रास्ता भी था,जो  सुनसान जंगल के बीच से ...

पार - महेश कटारे - 3
by राज बोहरे
  • 1.4k

महेश कटारे - कहानी–पार 3                                 अलसाता गिरोह चौक गया। कमला ने दीवार से टिकी ग्रीनर दुनाली झटके के साथ पकड़ ली। और कमर में बँधी बेल्ट से ...

भूत बंगला - भाग 3
by Shakti Singh Negi
  • 2.3k

दिव्य तलवार के मेरे हाथ में आते ही मेरे सब घाव अपने आप ठीक हो गए और मेरे शरीर में नया बल और उत्साह आ गया। मैंने तलवार से ...

पार - महेश कटारे - 2
by राज बोहरे
  • 1.3k

महेश कटारे - कहानी–पार 2                                 कमला मोहिनी में बँध उठी। घाटी और उसके सिर पर तिरछी दीवार की तरह उठे पहाड़ पर जगर–मगर छाई थी। जुगनुओं के ...

पार - महेश कटारे - 1
by राज बोहरे
  • 1.3k

महेश कटारे - कहानी–पार 1                                 जान–पहचानी गैल पर पैर अपने–आप इच्छित दिशा को मुड़ जाते थे। हरिविलास आगे था–पीछे कमला, उसके पीछे अपहरण किया गया लड़का तथा ...

भूत बंगला - भाग 2
by Shakti Singh Negi
  • 2k

भूत बंगला भाग 2   कुछ ही दूरी पर एक विशाल हिम मानव सा प्राणी एक जिंदे इंसान को खा रहा था। मैंने अपने कुलदेव का स्मरण किया। और तलवार ...

प्यार भी इंकार भी - 1
by किशनलाल शर्मा
  • 1.9k

सूरज दूर क्षितिज में कब का ढल चुका था।शाम अपनी अंतिम अवस्था मे थी।धरती से उतर रही अंधेरे की परतों ने धरती को अपने आगोश में समेटना शुरू कर ...

प्रायश्चित - भाग-21
by Saroj Prajapati
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  • 2.3k

किरण ने अपनी उखडती हुई सांसो को फिर से समेटा और शिवानी की ओर देखते हुए बोली "आपने मुझे जीवन का नया नजरिया दिया। मुझमें आशा का संचार किया। ...

रंभाला का रहस्य - भाग 1
by Shakti Singh Negi
  • 2.5k

   प्रताप अपनी स्टडी में बैठकर एक दुर्लभ पुस्तक का अध्ययन कर रहे थे। उनकी पत्नी उनके द्वारा कही गई बातों को कंप्यूटर पर माइक्रोसॉफ्ट वर्ड पर टाइप कर ...

जोरावर गढ़ - भाग 3
by Shakti Singh Negi
  • 2.2k

   यहां सभी लोग बहुत संपन्न थे। परंतु 40% लोग बहुत गरीब थे। अर्थात 8 लाख लोग बहुत गरीब थे। हालांकि अब यह भारत की प्रजा थे। परंतु ये ...

जोरावर गढ़ - भाग 2
by Shakti Singh Negi
  • 1.8k

प्रिया - भोजन कर लीजिए। मैं - ठीक है राजकुमारी जी।प्रिया - मैं कुछ देर में आती हूं।मैं - ठीक है जी।    मैंने भोजन कर लिया और हाथ मुंह ...