मुक्ति का पंचनीति मार्ग

(21)
  • 492
  • 1
  • 138

मुक्ति का पंचनीति मार्ग — श्री श्री ठाकुर अनुकूलचन्द्र की जीवन-दृष्टि भारतीय दर्शन में "मुक्ति" या "मोक्ष" को मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है। सामान्यतः लोग मुक्ति को मृत्यु के बाद प्राप्त होने वाली अवस्था के रूप में देखते हैं, किन्तु शास्त्रों की दृष्टि में मुक्ति का अर्थ इससे कहीं व्यापक है। भय, स्वार्थ, अहंकार, अज्ञान और दुःख के बन्धनों से मुक्त होकर सत्य, प्रेम, सेवा और ईश्वरानुभूति की दिशा में अग्रसर होना ही वास्तविक मुक्ति है।भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं—"मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते।" (गीता 7.14)अर्थात जो परम सत्य की शरण ग्रहण करते हैं,