50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 26

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(हवेली के मलबे के बीच हवा की सरसराहट। आग की लपटें अब बुझ चुकी हैं, बस कहीं-कहीं धुआं उठ रहा है। दूर किसी मंदिर की घंटी की धीमी आवाज़ आ रही है, जो इस सन्नाटे में एक अजीब सी पवित्रता घोल रही है।)आर्यन मलबे के बीच खड़ा था। उसने जेट को एक सुरक्षित दूरी पर लैंड कराया था। उसके पास न कोई याददाश्त थी, न ही कोई ढाल। वह बस एक खाली रूह की तरह खड़ा था, लेकिन उस सन्नाटे में अब उसे पिता की नफरत भरी आवाज़ नहीं, बल्कि अपनी खुद की अंतरात्मा की आवाज़ सुनाई दे रही थी।सीन