दो पतियों की लाडली पत्नी - 59

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तीनों घर पहुँचे…रात काफी हो चुकी थी…बाहर की चहल-पहल अब पीछे छूट चुकी थी। जैसे ही दरवाज़ा खुला…घर की शांति ने तीनों को घेर लिया। श्रेया अंदर आते ही सीधे सोफे की तरफ बढ़ी…और बिना कुछ सोचे… उस पर फैल गई।श्रेया (थकी हुई आवाज़ में) बोली - मैं… बहुत थक गई…उसने आँखें बंद कर लीं…और हाथ फैलाकर लेट गई… जैसे अब एक कदम भी चलने की ताकत नहीं बची हो।कबीर हल्का सा मुस्कुराया—किसने कहा था इतना घूमने को…श्रेया (आँखें बंद किए हुए ही) बोली - आप दोनों ने…करण चुपचाप खड़ा उसे देख रहा था।उसके चेहरे पर थकान थी…पर साथ में एक सुकून