(रात का वक़्त है।घर के बाहर ठंडी हवा चल रही है।सिमरन सो रही है — उसके चेहरे पर शांति है।करण खिड़की के पास खड़ा है, चाँद की तरफ देख रहा है।अचानक दूर किसी गली से कार की ब्रेक की आवाज़ आती है…)(करण चौक जाता है)वो खिड़की से बाहर देखता है — एक काली कार आकर रुकती है।उसमें से एक आदमी उतरता है — काले सूट में, चेहरे पर हल्की दाढ़ी,आँखों में ठंडापन… वही चेहरा — CEO अजय मेहरा।(करण की आँखें सिकुड़ जाती हैं, लाल चमकती हैं।)करण (धीरे से बुदबुदाते हुए) बोला - “वो… लौट आया…”( बाहर, CEO घर के गेट के